शास्त्रों में कहा गया है कि इंसान के जन्म होने से पहले ही उसकी मृत्यु का दिन निश्चित हो जाता है। भगवान के हाथ में जन्म और मृत्यु का चक्र है और आज तक भी इंसान इस चक्र को बिल्कुल नहीं समझ पाया है। अगर मृत व्यक्ति को जीवित करने की बात करें तो यह बात बिल्कुल ही कल्पना है औ कुछ नहीं है।

जब आत्मा शरीर से एक बार निकल जाती है तो उसका दोबारा शरीर में प्रवेश होना नामुमकिन होता है। लेकिन इस सभी बातों के उलट भगवान शंकर का एक ऐसा शिवलिंग है जो मृत व्यक्ति को दोबारा से जीवित कर देता है।

चलिए हम आपको उसी खास शिवलिंग के बारे में बताते हैं-

1. मान्यताओं की मानें तो इस शिवलिंग को अज्ञातवास के दौरान युधिष्ठिर ने स्थापित किया था जिसे आज महामंडेश्वर के नाम से भी जाना जाता है।

2. इस शिवलिंग को स्थापित करने के बाद युधिष्ठिर नेे यहाँ पर एक खूबसूरत और भव्य मंदिर भी बनवाया था।

3. मान्यताओं के अनुसार कौरवों ने पांडवों को आग में भस्म करने के लिए लाक्षागृह बनवाया था जिसमें वह पांडवों को जीवित ही जलाना चाहते थे।

 

4. बता दें कि यह मंदिर उत्तराखंड के देहरादून से कूछ ही दूरी पर लाखामंडल नाम की जगह पर है इसका धार्मिक तौर पर बहुत विशेष महत्व है।

5. इस शिवलिंग के बिल्कुल सामने पश्चिम दिशा की तरफ मुंह करके दो द्वारपाल भी है जो इसकी रखवाली करते हैं।

6. मान्यता के अनुसार यही दोनों द्वारपालों के पास किसी भी मरे हुए इंसान को लिटा देते हैं और फिर मंदिर के पुजारी उस मरे हुए व्यक्ति पर गंगाजल छिड़कते हैं उसके बाद वह व्यक्ति दोबारा जीवित हो जाता है।

7. जब इंसान जीवित हो जाता है तो वह गंगाजल सबसे पहले पीता है और उसके बाद वह दोबारा से शरीर त्याग कर परमात्मा में विलीन हो जाता है।

8. यहां पर जो शिवलिंग है वह मरे हुए व्यक्ति को दोबारा से जीवित करता है। लेकिन इस बारे में बहुत ही कम ऐसे लोग हैं जिन्हें पता है।

9. अगर किसी को पुत्र चाहिए तो वह स्त्री इस मेंदिर में शिवलिंग पर दीपक जलाकर प्रार्थना मांगती है तो उसकी गोद बहुत जल्दी भर जाती है।

10. जो व्यक्ति इस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन करता है वह कभी भी खाली हाथ नहीं जाता है। उस व्यक्ति के जीवन में सारे दुख और तकलीफें दूर हो जाती है।

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