दुनिया में कई सारे पेड़ पौधे हैं और उनमें से कई के बारे में हम पूरी जानकारी है तो वहीं कुछ ऐसे भी पेड़ हैं जिनके बारे में आजतक भी लोगों को बिल्कुल जानकारी नहीं है। दुनिया के सभी पेड़-पौधों के बारे में जानकारी लेना भी संभव नहीं होता है। लेकिन कुछ ऐसे पेड़ पौधे हमारे आसपास होते हैं जिनकी हम जानकारी तो ले ही सकते हैं। आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बाते बताने जा रहे हैं जिसका संबंध धरती से नहीं बल्कि स्वर्गलोग से जुड़ा हुआ है।

 

इस पेड़ को स्वर्ग से लेकर मृत्युलोग शिव भक्तों की मनोकामना करने के लिए लाया गया है। हम जिस पेड़ की बात कर रहे हैं उसका नाम पारिजात वृक्ष है और शास्त्रों में इस वृक्ष को सबसे ऊपर का स्थान दिया गया है। यह पेड़ उत्तर प्रदेश के बारांबकी जनपद में जो सफदरगंज के पास कोटवा आश्रम है वहीं पर यह पेड़ स्थिति है।

 

माता कुंती के लिए पांडव लाए थे यह पेड़

शास्त्रों के अुनसार महाभारत काल के दौरान जब पांडव माता कुंती के साथ अज्ञातवास भोग रहे थे तो वह उस समय इस जगह पर आए थे। कुंती माता शिवजी की बहुत बड़ी भक्त थी और वह हर रोज शिवजी की पूजा करती थीं जिसके लिए पांडवों ने इस शिव मंदिर की स्थापना की थी। माता कुंती शिवजी की पूरा पारिजात वृक्ष के पेड़ के फूलों से करती थीं और यह पेड़ पांडव श्रीकृष्ण के आदेश से सत्यभामा की वाटिका से लेकर आए थे। उसके बाद से यह पेड़ हमेशा से उसी स्थान पर है।

पारिजात वृक्ष को आयुर्वेद में हारसिंगार के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ के फूल से शिवजी की पूजा और लक्ष्मीजी की पूजा भी की जाती है और इसका बहुत ही महत्व होता है। इस वृक्ष को कल्पवृक्ष के नाम से भी जाना जाता है और समुद्र मंथन के दौरान इस पेड़ की उत्पत्ति हुई थी। उसके बाद इस पेड़ को देवराज इंद्र अपने साथ स्वर्ग लेकर चले गए थे और स्वर्ग लोग में इस पेड़ को सिर्फ उर्वशी ही छू सकती थी। उर्वशी इस पेड़ के स्पर्थ से अपनी थकान दूर करती थीं।

इस पेड़ के फूल बहुत अद्भुत हैं

पारिजात वृक्ष की कई सारी विशेषताएं हैं जिसके बारे में लोगों को नहीं पता है। पूरी दुनिया में ये ऐसा इकलौता पेड़ है जिसके बीज नहीं हैं। इसके अलावा इस पेड़ की कलम बोने से दूसरा पेड़ भी नहीं उगता है। इस पेड़ के जो फूल हैं वह सिफ रात को ही खिलते हैं और सुबह होने पर यह मुरझा जाते हैं जिसकी वजह से इस पेड़ के फूलों को अद्भुत कहा जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि इस पेड़ के फूलों को तोड़ा नहीं जा सकता है। अगर इस पेड़ के फूलों की पूजा करनी है तो उन्हें फूलों की पूजा हो सकती है जो खुद पेड़ से गिरे हैं। इस वृक्ष की ये सब सारी विशेषताएं हैं। इन विशेषताओं के बारे में पौराणिक कथाओं में कहानियां हैं। इस वृक्ष का महत्व बहुत है और इसकी महत्ता शास्त्रों में भी स्वीकार की गई है।

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