भगवान तिरुपति बालाजी का मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित हैं इस मंदिर में सबसे अमीर देवताओं में से एक माना जाता हैं । यहां दूर -दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते है अपनी इच्छा अनुसार यहां पर लोग चढ़वा चढ़ते है। तिरुपति जी के दरबार में अमीर और गरीब दोनों आते हैं।

हर साल यहां भारी मात्रा में लोग भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए तिरुमाला की पहाडिय़ो पर भीड़ लगाते हैं भगवान तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। कहा जाता है इस मंदिर में जो भी भक्त सच्चे दिल से कुछ भी मंगता है उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। भगवान तिरुपति बालाजी को वेंकटेश्वर, श्रीनिवास और गोविंदा के नाम से भी जाना जाता है।

 

भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर की है ये खासियत

इस मंदिर के बहुत ज्यादा विख्यात होने का कारण यहां के अद्भुत चमत्कार हैं। इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी हैं। इस मंदिर में वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे हुए बाल असली हैं और ये कभी भी उलझते नहीं हैं तथा हमेशा मुलायम रहते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां पर खुद भगवान विराजते हैं। भगवान बालाजी की मूर्ति पर अगर कान लगा के सुना जाए तो समुद्र की आवाज सुनाई देती है।

इसी कारण वश बालाजी की मूर्ति हमेशा ही नम रहती है। मंदिर में मुख्य द्वार के दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे में कहा जाता है कि इस छड़ी से बालाजी के बाल रूप में पिटाई की गई थी जिस कारण-वश उनकी ठोड़ी पर चोट लग गई और तब से आज तक उनकी ठोड़ी पर हमेशा से चंदन का लेप लगाया जाता है ताकि उनका घाव भर जाए।

बालाजी महाराज का पर चढ़ाए जाने वाले फूल-पत्ती या तुलसी के पत्ते भक्तों को नहीं दिए जाते हैं बल्कि पीछे स्थित एक जलकुंड में पीछे देखे बिना विसर्जित कर दिया जाता है। पुष्य को देखना और रखना अच्छा नहीं माना जाता है। इस मंदिर में चढऩे वाले सभी फूल, वस्तुएं जैसे घी-दूध आदि मंदिर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव से लाया जाता है। इस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है।

भगवान तिरुपति बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और ऊपर साड़ी से सजाया जाता है। तिरुपति का सम्पूर्ण क्षेत्र भगवान विष्णु के बैकुंठ धाम के बाद सबसे ज्यादा प्रिय है। श्री बालाजी तथा मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी काफी दर्शनीय है इसीलिए यह क्षेत्र पर्यटकों की एक पसंदीदा जगह बन गया है।