जैसा कि आप और हम सभी ने कई तरह की शादियां देखी हैं और उन शादियों में शामिल भी हुए हैं। लेकिन कुछ विभिन्न संस्कृतियों वाली शादी देखने का मजा ही कुछ अलग होता है और जो लोग ऐसी शादी देखते हैं वह काफी ज्यादा भाग्यशाली भी होते हैं क्योंकि बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें दूसरी संस्कृति वाली शादी देखने को मिलती हैं।

यहां तक कि जिन लोगों ने विभिन्न संस्कृतियों की शादियां देखी उनमें से कई ने अभी भी कई असमान भारतीय लोगों को नहीं देखा होगा। क्योंकि ये देश अपने आप में एक अलग सी दुनिया है। एक भारतीय शादी में कई रीति-रिवाज और रस्में होती हैं जिन्हें किसी विशेष धर्म,राज्य या जाति के साथ पहचाना जाता है। जबकि हम सभी ने हिंदू विवाह तो अकसर होते हुए देखें हैं लेकिन भारतीय शादियों में भी कुछ ऐसी शादियां होती हैं जो हैरान कर देने वाली हैं।

 

1.बंगाली शादी में मां अपने बेटे या बेटी की शादी में शामिल नहीं हो सकती

कुछ पारंपरिक रिवाज के अनुसार मां को अपने बेटे या बेटी की शादी में आने की अनुमति नहीं होती है। ऐसा माना जाता है कि मां का शादी में होने की वजह से बेटे या बेटी के शादीशुदा जीवन पर एक बुरा असर पड़ सकता है।

2.यूपी में एक जगह जहां पर बारात का स्वागत टमाटर से किया जाता है

यूपी के बहुत सारे आदिवासी इलाकें जैसे सरसौल जहां पर दूल्हे के स्वागत के लिए आरती की थली नहीं बल्कि उस पर टमाटरों से स्वागत किया जाता है।

3.महाराष्ट्रीयन शादी

महाराष्ट्रीयन शादियों में एक रिवाज है कि शादी में दुल्हन को भाई दूल्हे के कान मोड़ता है। ये रिवाज उन परिणामों का प्रतीक है जो शादी के बाज दूल्हा-दूल्हन की देखभाल नहीं करने पर पालन करेगा।

4.मणिपुरी की शादी

पारंपरिक मणिपुरी शादियों में पंरपरा के अनुसार दूल्हा और दुल्हन को निकटमतम तालाब में ढीली दो मछलियां को स्थापित करने की जरूरत होती है। मछली का तैरना वैवाहिक संबंध के भाग्य का अर्थ है।

5.बिहार की शादी

नई दुल्हन के लिए ये बात काफी हैरान कर देने वाली होती है लेकिन बिहार की शादियों में इस रिवाज का पालन करना होता है कि नवविवाहित को घर में प्रवेश करते वक्त अपने सिर पर रखे मिट्टी के बर्तन को संतुलित करना ही पड़ता है। इसके साथ ही सिर पर रखें बर्तन को बिना गिराए झुककर और पैर छूकर बड़ों का आशीर्वाद भी लेना जरूरी होता है।

6.मलयाली शादियों में

हिंदू रिति-रिवाज के अनुसार दुल्हा-दूल्हन आग के सात फेरे लेते हैं जबकि मलयामली शादियों में दूल्हा और दुल्हन सिर्फ आग के आगे 3 फेरे लेते हैं और शादी संपन्न हो जाती है।

7. जब दुल्हन मांगलिक हो

ज्यादातर शादियों के बारे में आप सभी लोगों ने सुना होगा कि जब एक लड़की मांगालिक होती है तो ऐसा कहा जाता है कि उसके पति पर कोई आंच आ सकती है। लेकिन कई लोगों का मानना है कि यादि मांगालिक लड़की की शादी कुत्ते या फिर पेड़ से करा दी जाए तो इसके बाद फिर वह एक इंसान से शादी कर सकती है क्योंकि ऐसे में इसे दूसरी शादी माना जाएगा और फिर पति को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा।

8. असम की शादी

असम में होने वाली शादियों में दुल्हा और दुल्हन माला का आदान-प्रदान करते हैं और शादी पूरी हो जाती है। इसके बाद दावत दी जाती है जो दुल्हन और दूल्हे द्वारा परोसी जाती है।

9. गुजराती शादियों में

ये एक बेहद मजेदार रिवाज है जो गुजराती सिर्फ गुजराती शादियों में प्रचलित है जिसमं दुल्हन की मां ने प्रथागत आरती करने के बाद चंचल तरीके से दूल्हे की नाक खींचती है।

10. तमिल ब्राह्मण विवाह

तमिल ब्राह्मण शादी में दूल्हे के लिए अपने मन को बदलने और शादी के स्थान छोडऩे और खुद को संन्यासी मानने के लिए तैयार होने के लिए प्रथागत है और फिर दुल्हन के पिता को उससे शादी की बात करनी पड़ती है।

11. महाराष्ट्रीयन शादियों में

महाराष्ट्रीयन शादियों में दूल्हा और दुल्हन को अलग करने के लिए एंट्रापट रेशम की शॉल का इस्तेमाल किया जाता है। जब तक कि दूल्हे को दुल्हन के गले में मंगलसूत्र बांधना नहीं पड़ता। अंतरापाट हटा दिए जाने के बाद ही दूल्हा और दूल्हन शादी के दौरान पहली बार एक-दूसरे को देख सकते हैं।

12. पंजाबी शादियों में

पंजाबी शादी में दूल्हा और दुल्हन की मां और भाभी मंदिर के पानी से भरे बर्तन के लिए पैदल मंदिर जाती हैं। इस पानी को पवित्र माना जाता है। वहीं शादी के कपड़े पहनने से पहले दूल्हा और दुल्हन को इसके साथ नहाना पड़ता है। वह पूरे रास्ते शादी के गीत गाते हैं।

13. असमिया शादी में तेल-दीया

असमिया शादी में तेल दीया की रस्म का पालन किया जाता है दुल्हन द्वारा ससुराल से शादी के कपड़े लेने से पहले उसको दिखाया जाता है। तेल दीया प्रदर्शन करते वक्त सास दुल्हन के बालों पर एक अंगूठी और बीटल का पत्ता रखती है और तीन बार बालों पर तेल लगाती है।

14.गुजराती समुदाय में-मधुपरखा

गुजराती समुदाय का ये भी एक रिवाज है जिस रिवाज का ये लोग शादियों में पालन करते है। इस रस्म के अनुसार बरात विवाह स्थल में पहुंचने से पहले दुल्हन के पिता को दूल्हे के पैरों को दूध और शहद से साफ करना बहुत जरूरी होता है। हालांकि कुछ रस्मों के अनुसार मधपर्क में दही शहद और घी से बना पोशक होता है जिसे दूल्हे को चढ़ाकर मंत्रों का पाठ करना होता है।

15. सिंधी शादियों में – सहंत

इस रिवाज का सिंधी शादियों में शादी समारोह से पहले पालन किया जाता है। सांत में एक पायल दोनों अपने-अपने घरों में दूल्हे और दुल्हन के टखने से बंधी होती है। जिन्हें आठ शादीशुदा महिलाएं दूल्हा और दुल्हने के सिर पर तेल डालती है। फिर जिसे नए जूते पहनकर और दाहिने पैर के साथ मिट्टी के बर्तन तोडऩे की आवश्यतकता होती है जिसे एक अच्छा शगुन माना जाता है।

16. कुमाऊँ की शादियों में – शादी में झंडे

कुमाऊं शादियों में एक रिवाज का पालन होता है जहां वह दोनों पक्षों के लिए झंडे लगाते हैं दूल्हे के लिए सफेद और दुल्हन के लिए लाल। शादी में जुलूस के अंतिम छोर पर और पीछे इन औपचारिक समारोहों को आगे बढ़ाया जाता है।