51 घंटे स्केटिंग कर बनाया एशिया रिकार्ड


चंडीगढ़ : सेक्रेड हार्ट स्कूल सेक्टर 26 की नवीं कक्षा की स्टूडेंट विदुषी रावत और द गुरुकुल स्कूल सेक्टर 20 पंचकूला के नितांश सिंगला ने रोलर स्केटिंग में ट्राईसिटी का नाम रोशन किया है। विदुषी रावत और नितांश सिंगला ने देश के चुनिंदा स्केटर्स के साथ मिलकर 51 घंटे स्केटिंग करके एशिया बुक आफ रिकार्डस और इंडिया बुक आफ रिकार्डस में अपना नाम दर्ज कराया है। कर्नाटक के बेलगाम में 31 मई से लेकर 3 जून तक 51 घंटे का रिकार्ड बनाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से स्केटर्स जुड़े थे। इसके अतिरिक्त 300 से अधिक स्केटर्स ने एक चेन बनाकर लगातार 4 घंटे स्केटिंग करके गिनिज बुक आफ रिकाड्र्स के लिए भी अपना दावा पेश किया है। विदुषी और नितांश दोनों नेशनल लेवल के स्केटर्स है। विदुषी को जहां चंडीगढ़ प्रशासन 26 जनवरी पर स्टेट अवार्ड के साथ सम्मानित कर चुका है वहीं नितांश को

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रिपब्लिक डे पर पंचकूला में खेल के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए सम्मानित किया था। विदुषी और नितांश ने बारिश और तेज धूप के बीच दिन रात स्केटिंग करके यह रिकार्ड बनाया है। विदुषी जहां स्टेट और नेशनल लेवल की स्केटिंग चैंपियनशिप में 170 से अधिक पदक जीत चुकी हे वहीं नितांश भी स्टेट चैंपियन है और नेशनल लेवल चैंपियनशिप में पदक जीत चुके है। लगातार 51 घंटे की स्केटिंग के दौरान रिकार्ड में भाग ले रहे स्केटर्स ने 200 मीटर ट्रेक के 4400 से अधिक राउंड पूरे किए। इसके साथ ही स्केटर्स ने इस रिकार्ड में  लगभग 880 किलोमीटर की दूरी तय की। नेशनल में रिकार्ड बनाना लक्ष्य विदुषी और नितांश का नेशनल स्कूल गेम्स और फेडरेशन गेम्स में रिकार्ड बनाने का है।

विदुषी और नितांश दोनों रोलिंग टाइगर्स अकादमी पंचकूला के स्केटर्स है। अकादमी के चीफ कोच चंद्र सिंघल के अनुसार विदुषी और नितांश का प्रदर्शन स्टेट और नेशनल लेवल की चैंपियनशिप मेंं सराहनीय रहा है।  इस साल भी दोनों से नेशनल लेवल पर पदक की उम्मीद है। चंद्र सिंघल के अनुसार इस उपलब्धि से स्केटर्स का मनोबल बढ़ेगा। विदुषी ने वर्ष 2016 में नेशनल स्कूल गेम्स में सिल्वर मेडल और सीबीएसई नेशनल गेम्स में दो गोल्ड जीते थे। इसके अतिरिक्त चंडीगढ़ स्टेट चैंपियनशिप में भी विदुषी ने तीन गोल्ड जीते थे। नितांश भी चंडीगढ़ स्टेट चैँपियनशिप में अपनी कैटेगिरी में चैंपियन रहे थे।

– अनूप कुमार