भारतीय क्रिकेटर शांतकुमारन श्रीसंत के भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उन पर लगाये गये आजीवन प्रतिबंध के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई अगस्त माह में की जाएगी। सर्वोच्च अदालत ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा तथा न्यायाधीश एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को सुनवाई के लिये आये इस मामले पर संज्ञान लेते हुये इसपर अगस्त में सुनवाई तय की है। इस मामले में वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) की तरफ से पेश हुये और उन्होंने बोर्ड के अनुशासनात्मक नियमों का हवाला दिया।

खुर्शीद ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों पर बीसीसीआई के आचार संहिता के निर्धारित नियमों के तहत फैसला लिया जाता है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह मामला पहले ही दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है जिसपर जुलाई के अंत मे कोई फैसला आना है, ऐसे में वह सर्वोच्च अदालत अगस्त में इस पर सुनवाई करेगा।

बीसीसीआई ने आईपीएल-2013 में स्पॉट फिकि्संग के दोषी पाये जाने पर श्रीसंत के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुये उन्हें क्रिकेट गतिविधियों से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। जनवरी 2017 में श्रीसंत ने बीसीसीआई से स्कॉटलैंड के ग्लेनरोथ्स क्रिकेट क्लब के लिये खेलने की अनुमति मांगी थी, लेकिन बोर्ड के इससे इंकार के बाद उन्होंने 28 फरवरी 2017 को अदालत में भारतीय बोर्ड के फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर दी थी।

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