छात्र खिलाडि़यों पर भारी दिल्ली फुटबॉल लीग


Football

नई दिल्ली : पिछले पचास सालों से सुस्त पड़ी दिल्ली की फुटबॉल ने यकायक रफ्तार पकड़ ली है। नए पदाधिकारियों को कुर्सियां संभाले अभी छह सप्ताह ही हुए हैं पर नए और युवाओं का जोश देखते ही बनता है । लगभग डेढ़ दर्जन कमेटियां गठित की जा चुकी हैं, जिनमे कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल किए गए हैं जिनको फुटबॉल की बजाय अन्य योग्यताओं के चलते सम्मान मिला है। दिल्ली साकर एसोसिएशन के अध्यक्ष शाजी प्रभाकरण और उनकी टीम अति उत्साह में पड़कर ऐसे निर्णय भी ले रही है जिनको लेकर सदस्य इकाइयां हैरान-परेशान हैं ।

मसलन दिल्ली साकर एसोसिएशन का नाम बदल कर फुटबॉल दिल्ली किया जाना और बी डिवीजन लीग 15 जनवरी से शुरू करना । जहां तक नाम में बदलाव की बात है तो इस मुद्दे को मिल बैठकर और बहुमत से तय किया जा सकता है । लेकिन लीग मैचों का जनवरी से मार्च के बीच खेल जाना गलत फैसला माना जा रहा है। कारण,स्कूल और कालेज की परीक्षाएं ​सिर पर हैं।

ज्यादातर क्लब अधिकारियों और खिलाडियों के अनुसार डीएसए यदि जिद्द पर अड़ी रही तो लीग का बायकाट तय है । आखिर कोई भी पांच-सात मैचों के लिए साल क्यों खराब करेगा। फिलहाल कई क्लब इस बारे में डीएस से कार्यक्रम में बदलाव के बारे में आग्रह करने जा रहे हैं क्योंकि बी डिवीजन के अधिकांश खिलाडी स्कूल और कालेजों के छात्र हैं । उनके लिए लीग में खेलना शायद ही संभव हो।