टेस्ट क्रिकेट की ड्रेस शुरु से ही सफेद रंग की रही है। जब से यह खेल शुरु हुआ है उस समय से ही इस खेल में हर खिलाड़ी सफेद रंग की ड्रेस पहनकर मैदान पर खेलने आते हैं।

लेकिन अक्सर आप सबके मन में यह तो सवाल आया ही होगा कि आखिर टेस्ट क्रिकेट में हर खिलाड़ी सफेद रंग की ड्रेस क्यों पहनते हैं। आज हम आपको इसी विषय के बारे में कुछ खास जानकारी देंगे कि आखिर टेस्ट मैच में सफेद कपड़े क्यों पहने जाते हैं।

परंपरा की वजह से पहनते हैं सफेद ड्रेस

सफेद कपड़ों से एक पारंपरिक पहलू जुड़ा हुआ है। क्रिकेट खेल 1800 दशक से खेला जा रहा है। वैसे सफेद रंग शुद्धता का प्रतीक है क्योंकि क्रिकेट को जैनटलमैन गेम भी कहा जाता है इसी वजह से इसे सफेद रंग दिया गया है। बता दें कि 2000 के दशक तक वनडे क्रिकेट में भी सभी सफेद कपड़े पहनते थे बस साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीमों को छोड़कर। हालांकि विश्वकप 1992 के बाद वनडे क्रिकेट में हर टीम को रंगीन कपड़े पहने की इजाजत दे दी गई। फिर 2002 के बाद तो वनडे क्रिकेट में पूरी तरह से रंगीन कपड़े आ गए। हर टीम की अपनी रंग की ड्रेस बन गई।

इससे जुड़ा एक आराम कारक भी है

जब भी टेस्ट क्रिकेट की बात करते हैं तो सबसे पहले दिमाग में एक ही बात आती है कि खिलाड़ी इसमें 5 दिन तक मैदान पर रहते हैं और वह तेज धूप में ही खेलते हैं। यह हर खिलाडिय़ों के लिए बहुत ही मुश्किल वाला अनुभव है।

गर्मी में सफेद कपड़े पहनने से गर्मी कम लगती है। रंगीन कपड़ों की तुलना में सफेद रंग खिलाडिय़ों के लिए बहुत आरामदायक है। यहां तक कि क्रिकेटर्स का जो तनाव स्तर होता है उसे भी कम किया जाता है और उन्हें कुछ हद तक तो सन-स्ट्रोक से बचाया जाता है।

गेंद अच्छे से दिख जाती है

आप सब जानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में गहरी लाल रंग की गेंद का इस्तेमाल किया जाता है। अगर क्रिकेटर्स सफेद रंग पहनकर खेलते हैं तो उन्हें लाल गेंद आसानी से दिख जाती है। यहां तक कि जब हम आज केदौर में टी20 और वनडे क्रिकेट की बात करते हैं तो रंगीन कपड़ों पर सफेद गेंद अच्छे से दिखाई दे जाएगी।