देश में पिछले कुछ समय ऐसा देख जा रहा है ‌कि टिकट बुक करते समय एसी कोच की टिकट पहले बुक हो जाती है। इसमें भी थर्ड एसी की बर्थ पहले बुक हो रही है और यह जल्दी ही वेटिंग लिस्ट में चली जाती है। इसके बाद स्लीपर और सेकेंड एसी का नंबर आता है। एसी कोच में सफर करने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।  अब सरकार को एक सुझाव आया है कि एसी कोच के अलावा अन्य कोच में जहां पर भी बेडरोल की सुविधा दी जाती है वहां पर बेडरोल की कॉस्टिंग को किराए में जोड़ दिया जाए। यह सुझाव खास तौर पर गरीब रथ और दूरंतों ट्रेनों के लिए आया है। बता दें कि गरीब रथ जैसी ट्रेनों का संचालन गरीब लोगों को एसी कोच में सफर करने का मौका उपलब्ध कराने के इरादे से शुरू किया गया था।

खबर है कि आम आदमी के लिये सस्ते किराये की सुविधा के साथ शुरू की गई वातानुकूलित ट्रेन गरीब रथ एक्सप्रेस के टिकट के दाम में ही बेडरोल का दाम जल्द ही जोड़ा जा सकता है। रेलवे एक दशक पहले तय हुए बेडरोल के 25 रुपये के किराये को भी बढ़ाने पर विचार कर रहा है जिससे किराये में खासी बढ़ोतरी हो सकती है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कपड़े के रखरखाव की लागत में तीव्र बढ़ावा होने से यह समीक्षा दूसरी ट्रेनों में भी लागू हो सकती है। गरीब रथ ट्रेनों की तरह दूसरी ट्रेनों में भी बेडरोल की कीमतों में एक दशक में कोई इजाफा नहीं हुआ है।

उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के कार्यालय से एक नोट आने के बाद यह विचार किया जा रहा है। इस नोट में पूछा गया था कि गरीब रथ में किराये का पुनरीक्षण क्यों नहीं किया गया और अनुशंसा की कि बेडरोल की लागत को ट्रेन के किराये में शामिल किया जाए।