घाटी में आतंकियों के खिलाफ तेज होंगे सेना के आॅपरेशन : आर्मी चीफ


श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में कल भाजपा द्वारा पीडीपी से गठबंधन तोड़ने और महबूबा मुफ्ती के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद आज से राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया है। यह आठवीं बार है जब जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया गया है। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा के शासन काल में चौथी बार राज्यपाल शासन लागू किया गया है।  राज्यपाल शासन लागू होने और सीजफायर खत्म होने को लेकर थलसेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने भी प्रतिक्रिया दी है।

जनरल रावत ने कहा, ‘हमने सिर्फ रमजान के दौरान (जम्मू-कश्मीर में) अपने ऑपरेशन रोके थे, लेकिन हमने देखा कि क्या हुआ। राज्यपाल शासन से हमारे ऑपरेशनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’राइजिंग कश्‍मीर’ के संपादक शुजात बुखारी और सेना के जवान औरंगजेब की हत्‍या के बाद सीजफायर को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान घाटी में आतंकी वारदातों में 100 फीसदी से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई थी।

 

रमजान मे सीजफायर के फैसले के बाद से ही आतंकियों ने कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है और इस दौरान लगभग तीन दर्जन से ज्यादा लोगों की जान गईं है जिसमें सेना के जवान, पुलिस और आम नागरिक शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इनमें दो दर्जन से ज्यादा लोग भी घायल भी हुए हैं।आपको बता दें कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफा देने के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया है। बीते एक दशक में यह चौथी बार है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगा है। बुधवार को भाजपा ने अपनी गठबंधन सहयोगी पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया था।

 

 

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