इलाहाबाद : उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि तकनीकी विकास के दम पर ही दुनिया को मुठ्ठी में लिया जा सकता है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) के 20वें वर्ष के प्रवेश के अवसर पर ‘बियोन्ड टि््वटीं बॉय 2020’ कार्यक्रम में छात्रों और उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए श्री नायडू ने शनिवार को कहा कि तकनीकी की दुनिया में यथासंभव विकास किये जाने की जरूरत है। तकनीकी विकास के बल पर ही देश नयी बुलदियों को छू सकता है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संस्थानों में से इलाहाबाद भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में शुमार है। तकनीकी विकास के लिए असीमित क्षेत्र है। जब देश में कम्प्यूटर लांच किया गया तो उस समय लोगों ने इसका विरोध किया कि इससे लोगों की नौकरी छिन जायेगी लेकिन आज उसी के सहारे कम समय में अधिक से अधिक काम निपटाये जा रहे हैं।

श्री नायडू ने कहा ‘ हम तकनीकी के दम पर एक दूसरे से ज्ञान विज्ञान की चीजों को शेयर कर सकते हैं1 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में शिक्षित अभियंताओं तथा शोधार्थियों की पहचान भारत में ही नहीं पूरे विश्व में है। यद्यपि, यह पहचान मुख्यत: उन अभियंताओं से है, जिन्होने यहाँ से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। इन संस्थानों की प्रसिद्धी के कारण, भारत में अभियांत्रिकी की पढाई करने का इच्छुक प्रत्येक विद्यार्थी इन संस्थानों में प्रवेश पाने की‘महत्वाकांक्षा’रखता है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि लोगों को ज्ञान अर्जन करने के बाद विदेशों में नहीं जाना चाहिए, अपने ही देश में रहकर उसके हाथ मजबूत करने चाहिए। आईआईटी में ज्ञान अर्जन करने के बाद पैसा कमाने के लालच में स्वदेश छोडकर किसी अन्य देश में लोग चले जाते हैं, जिसके कारण इससे भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा ‘ जीवन में मां, मातृ भाषा और देश को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। हमें अपनी मातृ भाष और देश पर गर्व होना चाहिए।

विदेशी भाषा अंग्रेजी तो ‘चश्मा’ के समान है। ज्ञान हमेशा ग्रहण करना चाहिए लेकिन निज भाषा को पहली प्राथमिकता देनी चाहिए। भाषा और भावना एक साथ चलता है। परिवार और मित्रों के बीच भी हमें अपने निज भाषा का ही प्रयोग अधिकाधिक करना चाहिए इससे आपसी प्रेम बढ़ता है। श्री नायडू ने कहा,’ अनेकता में एकता भारत की विशेषता है।’ गुरू के बिना ज्ञान कभी भी संभव नहीं हो सकता। उसका हमेशा सत्कार करना चाहिए। उसकी बदौलत ही हमें ज्ञान प्राप्त होता है। इस अवसर पर राज्यपाल श्री नाईक ने कहा कि आज दुनिया में इलाहाबाद का सांस्कृति, शिक्षा का महत्व है। जहां संस्कृति और शिक्षा मिल जाती है हीं इलाहाबाद कहलाता है। श्री नाईक ने कहा कि क्षेत्र में महिलायें पुरूषों की तुलना में तेजी से आगे बढ रही है। वह 28 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। अभी तक 26 में से 17 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को डिग्रियों का वितरण किया है उसमें 66 प्रतिशत लडकियों ने मेड़ल प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द, मोदी का ‘ बेटी बचाओ- बेटी पढाओ’ का नारा सार्थक हो रहा है।

बेटियों के शिक्षित होने से दो परिवार और समाज शिक्षित होता है। बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उनका कोई मुकाबला नहीं है। तकनीक के क्षेत्र में भी वह अव्वल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ ही मौलिक ज्ञान की बेहतर समझ जरूरी है। तकनीकी ज्ञान के साथ मौलिक ज्ञान का अर्थ है ‘सोने में सुहागा।’ केवल तकनीकी ज्ञान ही सब कुछ नहीं होता। तकनीकी ज्ञान विकास के अनेक रास्ते खोलता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में श्री अटल विहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार कार्य कर रही थी। उस समय समय यहां के स्थानीय सांसद मुरली मनोहर जोशी का योगदान इस संस्थान इलाहाबाद को प्रदान किया था। संस्थान ने अपने 20 वर्ष के इस कार्यकाल में एक लम्बी दूरी इसने तय की है। इसके अलावा संस्थान के साथ जुडी उपलब्धियां जुड़ हैं वह सराहनीय और वंदनीय हैं।

श्री योगी ने कहा कि 20 वर्षों के दौरान इस संस्थान का प्लेसमेंट शत प्रतिशत रहा। इस संस्थान ने इन 20 वर्षो के अन्तराल के मात्र 15 वर्षों में राष्ट्रीय संस्थान का दर्जा प्राप्त कर लिया। संस्थान राष्ट्रीय दायित्व के साथ आगे बढ रहा है। देश और दुनिया के सामने हम अपने विजन को कैसे रखे यह बहुत महत्व रखता है। उन्होने कहा कि ट्रिपल आईटी से जुडे हुए जो छात्र हैं, उन्हें अभी तक बंगलूरू की तरफ देखना पड़ता था, आने वाले समय में उत्तर प्रदेश उनका इन्तजार कर रहा है। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपनी मेधा, तकनीकी के माध्यम से प्रदेश और देश के विकास में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की संभावनाओं को अनेक लोग तलाशते होंगे।

आज हम सुशासन की बात करते हैं तो हमें तकनीकी को अपनाना पडेगा सुशासन के लोक कल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम पायदान पर खड़ व्यक्ति तक पहुंचाना है तो, इसमें तकनीकी एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकती है। श्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सत्ता मिलने के बाद सबसे पहले हमने आम लोगों में वितरण होने वाली खाद्य समस्या का निपटारा कराने का काम किया। पहली बार राशन कार्ड की सत्यापन कराया गया तो करीब 30 कार्ड जाली मिले। उन कार्डों को निरसत कराकर दूसरे कार्ड बनाये गये। कोटेदार कार्ड से आम लोगों तक पहुंचने वाले राशन को बाजार में बेच कर लाभ कमाते थे। इस काला बजारी रोकने के लिए शहरी क्षेत्र में 13 हजार ग्राइंट सेट मशीने लगवाई1 इसके तहत कोई भी लाभार्थी किसी भी राशन की दुकान पर जाकर अपना राशन देख सकता है। 80 हजार मशीने लगाई जानी हैं।