दिन भर की चर्चा के बाद लोकसभा में 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण बिल के लिए संविधान संशोधन बिल पास हुआ  बिल को समर्थन में 323 वोट पड़े और विरोध में 3 वोट पड़े। सदन में कुल 326 सांसद मौजूद थे। लोकसभा में वोटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज रात संविधान के 124वें संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद सदस्यों को संबोधित करते हुए सत्र में हुए कामकाज का विवरण रखा और उसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

केंद्रीय मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने बताया कि भारत सरकार ने गरीब लोगों के लिए सवा सौ से ज्यादा योजनाएं बनाई हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में बिना गारंटी दिए 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को लोन दिया। 4 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्होंने पहली बार लोन लिया है।

गरीबी के मापदंड संबंधित सवाल का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि इसका मापदंड गरीबी रेखा मापदंड के आधार पर होगा। थावरचंद्र गहलोत ने कहा कि जो लोग ऊंची जाति में होने के बाद भी अनुसूचित जाति जन जाति से भी बुरी स्थिति में हैं उन्हें इस आरक्षण के जरिए रोजगार और शैक्षिक स्तर पर समानता का माहौल मिलेगा।

आपको बता दे कि लोकसभा में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी नौकरियों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किया। बता दे कि मोदी कैबिनेट ने सोमवार को ही आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को लोगों को आरक्षण देने का फैसला किया था। लोकसभा से पारित होने के बाद इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जिसके लिए राज्यसभा के सत्र को एक और दिन के लिए बढ़ाया गया है।

बता दे कि इस संविधान संशोधन के जरिये सरकार को ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी नागरिक’’ को आरक्षण देने का अधिकार मिल जायेगा। आरक्षण की अधिकतम सीमा 10 फीसदी तय की गयी है। ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग’’ की परिभाषा तय करने का अधिकार सरकार पर छोड़ दिया गया है जो अधिसूचना के जरिये समय-समय पर इसमें बदलाव कर सकती है। इसका आधार पारिवारिक आमदनी तथा अन्य आर्थिक मानक होंगे।

इससे पहले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने 124वाँ संविधान संशोधन विधेयक सदन में पेश किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

सरकारी नौकरियों के साथ निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में भी गरीबों के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू होगी, चाहे वह सरकारी सहायता प्राप्त हो या न हो। हालाँकि, संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत स्थापित अल्पसंख्यकों के शिक्षण संस्थानों में यह आरक्षण लागू नहीं होगा। साथ ही नौकरियों में सिर्फ नियुक्ति में ही आरक्षण होगा।

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान विधेयक में किया गया है। यह आरक्षण मौजूदा आरक्षणों के अतिरिक्त होगा और इसकी अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत होगी।

विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में लिखा गया है ‘‘यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उच्च शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में उचित अवसर मिले, संविधान में संशोधन का फैसला किया गया है।’’ विधेयक के जरिये संविधान के 15वें और 16वें अनुच्छेद में संशोधन किया जायेगा।

इसमें कहा गया है कि अभी आर्थिक रूप से कमजोर लोग बड़े पैमाने पर उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश तथा सरकारी नौकरियों से वंचित हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से मजबूत वर्ग के साथ प्रतिस्पर्द्धा नहीं कर पाते। यदि वे सामाजिक तथा शैक्षिक रूप से पिछड़पन के विशेष मानकों को पूरा नहीं करते तो संविधान के अनुच्छेद 15 तथा अनुच्छेद 16 के तहत आरक्षण के भी पात्र नहीं होते।

सरकार ने पहले से दिये गये 50 प्रतिशत आरक्षण से छेड़छाड़ नहीं करके सराहनीय काम किया – नंद कुमार सिंह चौहान

भाजपा के नंद कुमार सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने पहले से दिये गये 50 प्रतिशत आरक्षण से छेड़छाड़ नहीं करके सराहनीय काम किया है। उन्होंने कहा कि यदि समान्य वर्ग के कमजोर तबके के लिए आरक्षण को लेकर पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील सरकार की नीयत सही होती तो वह भी संविधान संशोधन विधेयक ला सकती थी।

मोहम्मद बशीर ने विधेयक लाने के तरीके को नाटकीय

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर ने विधेयक लाने के तरीके को नाटकीय बताया और कहा कि इसमें संविधान की सभी प्रक्रियाओं को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य सिर्फ अगला लोकसभा चुनाव जीतना है। श्री बशीर ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण देना संविधान की आत्मा के खिलाफ है।

प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह विधेयक ऐतिहासिक

रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह ऐतिहासिक विधेयक है। वह इसके प्रावधानों का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे लाने का समय चुनाव से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अचानक यह विधेयक लाकर सदस्यों को संशोधन सुझाने के अधिकार से भी वंचित कर दिया। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए सीमा आठ लाख रुपये से घटाने की माँग की।

आर्थिक आधार पर कमजोर व्यक्ति की पहचान कैसे की जाएगी – दुष्यंत चौटाला

इंडियन नेशनल लोक दल के दुष्यंत चौटाला ने कहा कि आर्थिक आधार पर कमजोर व्यक्ति की पहचान कैसे की जाएगी।

असदुद्दीन ओवेसी ने विधेयक का किया विरोध

एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवेसी ने विधेयक का विरोध किया और कहा कि यह संविधान के साथ धोखा और मजाक है। जनता दल यू के कौशलेन्द्र कुमार ने विधेयक को सरकार का साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताया है।

समाज के लिए जो भी काम हों उनका लाभ सिक्किम के लोगों को भी मिलना चाहिए – पी डी राय

एसटीएफ के पी डी राय ने कहा कि समाज के लिए जो भी काम हों उनका लाभ सिक्किम के लोगों को भी मिलना चाहिए। असम्बद्ध पप्पू यादव उफै राजेश रंजन ने कहा कि समान शिक्षा होगी तो आरक्षण जैसे पचड़ में पड़ने की जरूरत नहीं होगी।

मोदी सरकार ने गरीब ब्राह्मण के बेटे का सपना पूरा कर दिया – हुकुदेव नारायाण यादव

भाजपा के हुकुदेव नारायाण यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने गरीब ब्राह्मण के बेटे का सपना पूरा कर दिया है।

आरक्षण मात्र से आर्थिक समृद्धि नहीं आ सकती – उपेन्द्र कुश्वाहा

सरकार से हाल ही में अलग हुये राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेन्द्र कुश्वाहा ने कहा कि सरकार को आरक्षण की बजाय वास्तव में युवाओं की बेरोजगारी का हल ढूँढ़ना चाहिये। आरक्षण मात्र से आर्थिक समृद्धि नहीं आ सकती। उन्होंने समान्य वर्ग के आरक्षण में भी सरकारी स्कूलों में पढ़ छात्रों को प्राथमिकता देने की माँग की।

विधेयक की नीति का करते हैं समर्थन – दीपेन्द्र हुड्डा

कांग्रेस के दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि वह विधेयक की नीति का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें सरकार की नीयत पर विश्वास नहीं है। उन्होंने भी अंतिम सत्र के अंतिम दिन विधेयक लाने के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था सबसे पहले सितम्बर 2013 में हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने की थी। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुये कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन उल्टे पिछले पाँच साल में तीन करोड़ रोजगार घटे हैं और बेरोजगारी का अवसर 70 साल के निचले स्तर पर आ गया है।

पहली नजर में यह चुनावी स्टंट है लेकिन सामान्य वर्ग के गरीबों को भी मिलना चाहिये आरक्षण – भगवंत मान

आम आदमी पार्टी के भगवंत मान ने कहा कि पहली नजर में यह चुनावी स्टंट है। हम भी मानते हैं कि सामान्य वर्ग के गरीबों को भी आरक्षण मिलना चाहिये, उन्हें भी ऊपर आना चाहिये। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण को संविधान में जगह दिलाना चाहती है और उसकी वास्तविक योजना धीरे-धीरे अनुसूचित जाति/जनजाति का आरक्षण खत्म करना है।

इस देश में दो ही जाति है – अमीर और गरीब : निशिकांत दुबे

भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि इस देश में दो ही जाति है – अमीर और गरीब। उन्होंने जाति व्यवस्था को मुगलों और अंग्रेजों की देन बतायी और कहा कि पहले देश में वर्ण व्यवस्था थी पर मुगलों और अंग्रेजों के कारण यह जाति व्यवस्था में बदल गयी।

जय प्रकाश नारायण यादव ने अन्य पिछड़ वर्ग के लिए 85 प्रतिशत आरक्षण की माँग की

राजद के जय प्रकाश नारायण यादव ने भी इसे पेश करने का तरीके का विरोध करते हुये कहा कि यह धोखा है। उन्होंने अन्य पिछड़ वर्ग के लिए 85 प्रतिशत आरक्षण की माँग की तथा कहा कि शेष 15 फीसदी में सरकार जो चाहे करे। उन्होंने कहा कि चुनाव से तीन माह पहले यह विधेयक लाकर सरकार देश को धोखा दे रही है।

सामान्य वर्ग में भी बड़े तबके को सहारे की जरूरत – महेन्द्र नाथ पांडे

भाजपा के महेन्द्र नाथ पांडे ने कहा कि संविधान के नीति निर्धारक तत्त्वों में जिस ‘दुर्बल’ की बात की गयी है आज सरकार ने उसका विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग में भी बड़े तबके को सहारे की जरूरत है।

धर्मेन्द्र यादव ने जाति जनगणना के आँकड़ सार्वजनिक करने की माँग की

सपा के धर्मेन्द्र यादव ने भी विधयेक का समर्थन किया लेकिन इसे जिस तरीके से सदन के समक्ष लाया गया है उसे गलत बताया। उन्होंने जाति जनगणना के आँकड़ सार्वजनिक करने की माँग की।

लोकतंत्र में पहली बार आरक्षण जाति की बजाय वर्ग की श्रेणी में प्रवेश कर रहा है – भर्तृहरि मेहताब

बीजू जनता दल के भर्तृहरि मेहताब ने कहा कि आज देश में इतिहास लिखा जा रहा है जब लोकतंत्र में पहली बार आरक्षण जाति की बजाय वर्ग की श्रेणी में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को देखना होगा कि आर्थिक स्थिति हमेशा बदलती रहती है। एक साल कोई दायरे में आता है तो अगले साल दायरे से बाहर हो जाता है। जबकि आज दायरे से ऊपर रहने वाले लोग कल दायरे में आ भी सकते हैं। आखिर इस स्थिति की निगरानी कैसे होगी।

जितेन्द्र चौधरी ने सवाल किया कि आखिर यह विधेयक संसद के सत्र के आखिरी दिन क्यों लाया गया

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जितेन्द्र चौधरी ने सवाल किया कि आखिर यह विधेयक संसद के सत्र के आखिरी दिन क्यों लाया गया। सरकार ने रोत्रगार का कोई आंकड़ नहीं दिया है। रोजगार निरंतर घटता जा रहा है। आखिर यह आरक्षण कैसे मिलेगा। उन्होंने विधेयक को अधिक व्यापक बनाने के लिए उसे संयुक्त संसदीय समिति को सौंपने की मांग की।

वाम दलों ने सामान्य वर्ग के आरक्षण का किया विरोध

वाम दलों ने आर्थिक रूप से पिछड़ लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने का विरोध किया है और इसे मोदी सरकार का ‘बड़ा जुमला’ और ‘चुनावी तिकड़म’ करार दिया है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने आज यहां जारी विज्ञप्ति में यह बात कही है। माकपा पोलित ब्यूरो ने कहा है कि संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सरकार ने चुनाव को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में यह विधेयक पेश किया, जो केवल ‘चुनावी तिकड़म’ है। यह इस बात का सबूत भी है कि पिछले चार साल में मोदी सरकार रोजगार पैदा करने में बुरी तरह विफल रही है और यह उसकी बदहवासी का भी प्रमाण है। पांच राज्यों में चुनावी हार के बाद चुनावी किस्मत सुधारने के लिए उसने यह कदम उठाया है।

पार्टी ने कहा है कि निजी क्षेत्र को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के कारण आरक्षण का लाभ वंचित नहीं मिल पा रहा है।  भाकपा महासचिव सुधाकर रेड्डी ने अपने बयान में कहा है कि सरकार ने फिर यह बड़ा जुमला फेंका है।

मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा तो की है, लेकिन निजी क्षेत्र में आरक्षण देने के मामले पर चुप्पी साध रखी है। पार्टी ने कहा है कि राफेल मुद्दे, भ्रष्टाचार और महंगाई से लोगों का ध्यान हटाने के लिए मोदी सरकार ने यह कदम उठाया है।

हमारी पार्टी विधेयक का करती हैं स्वागत – सुप्रिया सुले

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सुप्रिया सुले ने कहा कि वह इस विधेयक का स्वागत करती हैं। लेकिन इस पर अधिक बहस होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय न्यायिक सेवा आरंभ किये जाने के श्री पासवान के सुझाव का समर्थन किया।

उच्च जाति के गरीब लोगों को मिलेगा आरक्षण – रामविलास पासवान

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने 10 फीसदी आरक्षण से जुड़े 124वें संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि मोदी सरकार को दलित विरोध कहा जाता था लेकिन हमने SC/ST एक्ट को तीन दिन के भीतर संसद से पारित कराकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा था।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का काम किया. राम मंदिर के नाम पर हल्ला हो रहा था, तब हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान और कोर्ट के मुताबिक ही राम मंदिर पर फैसला लिया जाएगा।

पासवान ने कहा कि उच्च जाति के गरीब लोगों को अब आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन के दौरान हम उच्च जाति के गरीबों का आरक्षण देना चाहते थे लेकिन तब कानूनी आधार पर वह हो नहीं सका। उन्होंने कहा कि पिछड़ी जाति के लोग सभी तरह की मेहनत कर सकते हैं लेकिन ब्राह्मण सिर्फ मंदिर में पूजा-पाठ कर पाने में सक्षम हैं। उच्च जाति के लोग भी अब काफी गरीब हो गए हैं और उन्हें भी समान अवसर मिलने चाहिए।

आरक्षण का लाभ पाने के लिए प्रमाणपत्र लाभार्थी एवं सरकार दोनों के लिए होगी एक चुनौती – शिवसेना

शिवसेना के आनंदराव अडसूल ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का लाभ पाने के लिए प्रमाणपत्र लाभार्थी एवं सरकार दोनों के लिए एक चुनौती होगी। प्रमाणपत्र के फर्जीवाड़ से बचना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने देरी से ही सही पर दुरुस्त कदम उठाया है। वह इस विधेयक का समर्थन करते हैं।

जितेन्द्र रेड्डी ने बिल का किया समर्थन

तेलंगाना राष्ट्र समिति के ए.पी.जितेन्द्र रेड्डी ने विधेयक का समर्थन किया और कहा कि आत्रादी के बाद दुर्बल वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए कोई ढांचागत विकास का काम नहीं हुआ। उन्होंने मांग की कि आरक्षण के विषय को राज्यों को दे दिया जाना चाहिए। उन्हीं को अनुपात तय करने की इजाजत दी जानी चाहिए।

आरक्षण कांग्रेस के जुमला घोषणापत्र में भी था – अरुण जेटली

10 फीसदी आरक्षण पर सदन में संबोधन के दौरान अरुण जेटली ने कहा कि यह आरक्षण बिल सबका साथ, सबका विकास को सुनिश्चित करता है. उन्होंने इसे समानता के लिए उठाया गया कदम बताया है। जेटली ने कहा कि यह बिल समाज का उत्थान करेगा। जेटली ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि आरक्षण कांग्रेस के जुमला घोषणापत्र में भी था।

वित्त मंत्री ने कहा कि पहले से मौजूद कोटा के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी. अरुण जेटली ने कहा कि वह मौजूदा कोटा सिस्टम के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। यह बिल आर्थिक समानता के लिए है। उन्होंने कहा कि इस बिल से गरीब सवर्णों की स्थिति बेहतर होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के लिए 50 फीसदी की सीमा तय कर दी है। इस पर जेटली ने कहा पहले भी कई बार कोशिश की गई है लेकिन वो नाकाम रहे क्योंकि वे नोटिफिकेशंस के जरिए नहीं आए थे।

जेटली ने कांग्रेस से अपील करते हुए कहा कि यह कांग्रेस की परीक्षा है। इसी के साथ इस बिल पर कांग्रेस से समर्थन की मांग करते हुए जेटली ने अपना भाषण खत्म किया।

सपा ने पिछड़े वर्गों को 54 प्रतिशत आरक्षण देने की शर्त जोड़ी

सामान्य वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर सपा ने राज्यसभा में समर्थन देने की हामी भरते हुये पिछड़े वर्ग के आरक्षण की सीमा में बढ़ोतरी करने की शर्त लगा दी है।

राज्यसभा में सपा के नेता रामगोपाल यादव ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में संवाददाताओं को बताया कि सामान्य वर्ग के आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक बुधवार को उच्च सदन में पेश होने पर सपा इसका समर्थन करेगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को इसे अमल में लाने के लिये आरक्षण की अधिकतम 50 प्रतिशत की सीमा को लांघना होगा।

यादव ने कहा कि सरकार ने इसके लिये ही संविधान में संशोधन की पहल की है। इसके मद्देनजर सपा की मांग है कि आबादी में पिछड़े वर्गों की 54 प्रतिशत भागीदारी को देखते हुये अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 54 प्रतिशत की जाये।
सरकार ने सामान्य वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के प्रावधान संबंधी संविधान (124वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया और मंगलवार को निम्न सदन में इस पर चर्चा चल रही है।

केंद्र ने 10 प्रतिशत आरक्षण के साथ एक विनाशकारी खेल शुरू किया है : द्रमुक

द्रमुक ने मंगलवार को कहा कि केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने सरकारी नौकरियों और शिक्षा में ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों’ के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के अपने प्रस्ताव का इस्तेमाल करते हुए पिछड़े वर्गों और अन्य लोगों के साथ एक ‘विनाशकारी खेल’ शुरू किया है।

लोकसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत के आरक्षण को मंजूरी दे दी ।

द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने आरोप लगाया कि आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण देने का यह कदम उठाया गया है और राज्य में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक से तमिलनाडु विधानसभा में इस मामले पर केंद्र के खिलाफ एक प्रस्ताव लाने की मांग की ।

विधानसभा में विपक्ष के नेता स्टालिन ने मंगलवार को सदन के पटल पर इस मुद्दे को उठाया और तमिलनाडु में दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की ओर से किये गए 69 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के बारे में सरकार को याद दिलाया।

राज्य सरकार ने इस बारे में कहा कि केंद्रीय कैबिनेट का कदम केवल एक ‘नीतिगत निर्णय’है और इस संबंध में केंद्र की तरफ से कोई अधिसूचना नहीं मिली है।

10 फीसदी आरक्षण को लागू करने की रूपरेखा पर काम कर रहा है HRD मंत्रालय

आपको बता दे कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय उच्च शैक्षिक संस्थानों में सामान्य वर्ग के ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर’’ लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने की रूपरेखा पर काम कर रहा है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर’’ तबकों के लिए नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दी है। भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को आरक्षण दिया जाए।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय इस पर काम कर रहा है कि इस आरक्षण को लागू करने के लिए शैक्षिक संस्थानों में कितनी सीटों को बढ़ाने की जरुरत है।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘अभी यह रूपरेखा तैयार नहीं की गई है कि आरक्षण कैसे लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालय और शैक्षिक संस्थान चाहे वे सरकारी हो या निजी उन्हें आरक्षण लागू करना होगा।’’

सूत्र ने कहा, ‘‘प्रारंभिक आकलन के अनुसार केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम जैसे अन्य प्रतिष्ठित उच्च शैक्षिक संस्थानों समेत देशभर में संस्थानों में करीब 10 लाख सीटें बढ़ानी होगी।’’

उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार, देश में कुल 903 विश्वविद्यालय, 39000 से अधिक कॉलेज और 10,000 से अधिक संस्थान हैं।

यह प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को प्राप्त 50 फीसदी आरक्षण से अलग होगा और इससे कुल आरक्षण 60 फीसदी हो जाएगा।