चारा घोटाला मामले में शनिवार को लालू की किस्मत का फैसला सुनाया जाएगा। इस मामले में विशेष CBI कोर्ट में लालू प्रसाद यादव समेत बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई राजनेताओं और अधिकारियों के भाग्य का फ़ैसला करेगी। यह मामला 1990 से 1994 के बीच देवघर ट्रेजरी से चारा खरीद के नाम पर करीब 84.53 लाख की अवैध निकासी से जुड़ा हुआ है।

चारा घोटाला सीबीआई के इतिहास का वो मामला है जिसमें बड़ी संख्या में आरोपियों को सज़ा हुई है। बिहार की सत्ता संभालने वाले लालू प्रसाद की परेशानियां खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। 1990 से 1994 के बीच चारा खरीद के नाम पर देवघर कोषागार से हुई अवैध निकासी मामले में रांची की सीबीआई अदालत फैसला सुनाने जा रही है।

इस चर्चित घोटाले में फर्जी विपत्र के आधार पर करीब 84.53 लाख की निकासी हुई थी। 1995 में सीएजी (कैग) के रिपोर्ट के बाद निगरानी जांच शुरू हुई जो महज एक महीने के अंदर पूरी कर ली गई। इन सबके बीच 15 मई 1996 को सीबीआई ने शिकंजा कसते हुए लालू, जगन्नाथ मिश्र समेत 34 लोगों पर मामला दर्ज कर इसकी जांच शुरू की।

28 अक्टूबर 1997 को सीबीआई ने सबूतों के साथ सभी 34 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर सभी की मुश्किलें बढ़ा दी। जानकारी के अनुसार अदालत के फैसले से एक दिन पहले लालू प्रसाद यादव ने कहा की इस मामले में साफ-साफ दस्‍तावेजों के साथ जो आरोप सीबीआई ने लगाए उसका जवाब हम निचली अदालत में दे चुके हैं। हमने भी अदालत में बयान दिया है।  मुझ पर चारा घोटाले को लेकर अलग-अलग केस दर्ज हुए। सब पर एक ही आरोप है पर अलग-अलग ट्रायल चल रहा है।

23 दिसंबर को अदालत ने बुलाया है। हमको न्‍याय व्‍यवस्‍था पर विश्‍वास है। हम पर केस मेकआउट नहीं होता है। उन्‍होंने कहा कि ये लोग लालू की शक्ति को जानते हैं कि ये डरने वाला नहीं है। इन्‍होंने हम पर और हमारे बच्‍चों पर केस करके हमको नीचा दिखाना चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि नीतीश कुमार, सुशील मोदी, बीजेपी, आरएसएस जानते हैं कि लालू से मुकाबला नहीं हो सकता है। इसलिए इसे रोक दो।

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