बुलेट ट्रेन परियोजना में अब गोदरेज कथित तौर पर रोड़ा बनकर उभरा है। दरअसल, सरकार विक्रोली में गोदरेज समूह की जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है जिसके खिलाफ समूह ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

समूह ने राष्ट्रीय हाई स्पीड रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित जमीन के पास दूसरा हिस्सा देने की पेशकश की है। खबरों के मुताबकि जिस 3.5 हेक्टेयर जमीन के खिलाफ गोदरेज समूह हाईकोर्ट पहुंचा वहां 508 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक में से 21 किलोमीटर ट्रैक अंडरग्राउंड बिछाने की योजना है।

अंडरग्राउंड टनल के एंट्री प्वाइंट्स में से एक गोदरेज की विक्रोली वाली जमीन की हद में आता है। इसी बात से नाराज से होकर बॉयस मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड (गोदरेज ग्रुप की कंपनी) मई में बोम्बे हाईकोर्ट पहुंची थी।

कोर्ट में कंपनी ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित अधिग्रहण की जाने वाली जमीन के खिलाफ अपनी दलील दी। पिछले महीने समूह ने कहा कि वह विकल्प के तौर पर दूसरी जमीन मुहैया करा सकता है। यह जगह प्रस्तावित प्रोजेक्ट से 250 मीटर की दूरी पर है। कोर्ट में समूह ने अपनी दलील में कहा है कि मूल साइट पर उसका गोदाम है, जिसके विस्तार की योजना है।

मुंबई से अहमदाबाद तक करीब 508 किलोमीटर की दूरी ये बुलेट ट्रेन तय करेगी। इसके बीच कुल 12 स्टेशन होंगे. बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स से शुरू होकर ये ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, आणंद, अहमदाबाद होते हुए साबरमती स्टेशन पहुंचेगी।

आपको बता दे कि बुलेट ट्रेन करीब 468 किलोमीटर का सफर एलिवेटेड रोड यानी जमीन से ऊपर बने ट्रैक पर करेगी. 21 किमी का सफर अंडरग्राउंड यानी जमीन के नीचे करेगी। इसमें 7 किलोमीटर वो समंदर के नीचे का सफर भी शामिल है। करीब 13 किमी का सफर बुलेट ट्रेन जमीन पर तय करेगी. 2023 तक बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी।

फिलहाल बुलेट ट्रेन में 10 डिब्बे होंगे. जिनमें करीब साढ़े सात सौ लोग एक साथ सफर कर पाएंगे। हर दिन एक तरफ से पैंतीस ट्रेनें चलेंगीं. रोजाना करीब 36 हजार लोग सफर कर सकेंगे। 2053 तक ये क्षमता 1 लाख 86 हजार लोगों की यात्रा की हो जाएगी। इसका किराया 2700 से 3000 रूपए तक होगा।