सरकार ने मानसून सत्र के दौरान विवादों में घिरे एफआरडीआई विधेयक को वापस लेने का फैसला किया है। बुधवार को कैबिनेट ने बिल वापस लेने के फैसले को मंज़ूरी दी। इस विधेयक में ‘ बेल – इन ’ अनुच्छेद को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। माना जा रहा है कि इस प्रावधान से बैंक में धन जमा करने वाले ग्राहकों के हितों को नुकसान होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। बैंकों में जमा ग्राहकों की धनराशि की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। गुजरात चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया था ।

फ़िलहाल यह बिल बीजेपी सांसद भूपेन्द्र यादव की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के सामने है। सरकार इसी सत्र में इसे वापस ले लेगी अभी तक ग्राहकों का बैंकों में जमा एक लाख रुपया ही सुरक्षित है विपक्ष का आरोप था कि सरकार ग्राहकों के पैसों से बैंकों की मदद करना चाहती थी। सरकार के मुताबिक विपक्ष केवल भ्रम फैला रहा था सरकार चुनावी साल में कोई भ्रम नहीं चाहती इसलिए बिल वापस होगा।

बता दें कि यह विधेयक लोकसभा में 11 अगस्त 2017 को पेश किया गया था। विधेयक में बैंकों की ‘ संकट में सहायता ’ का प्रावधान किया गया था। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार इस उपाय से बैंक में अपनी मेहनत की कमाई जमा रखने वाले ग्राहकों के हितों को चोट पहुंच सकती थी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिज्ञों के साथ साथ विभिन्न पक्षों ने चिंता जताई थी। इसके बाद सरकार ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के हवाले कर दिया था।