कांग्रेस ने गुजरात के राज्यपाल ओ पी कोहली को एक पत्र लिख कर राज्य की विजय रूपाणी सरकार को मंत्रियों जैसे अधिकार और वेतन वाले संसदीय सचिवों की नियुक्ति की इजाजत नहीं देने का आग्रह किया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और गुजरात के पूर्व विधायक शक्तिसिंह गोहिल ने आज बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान संसदीय सचिवों की नियुक्ति को असंवैधानिक बताया है।

इस आदेश की प्रति के साथ राज्यपाल को भेजे पत्र में उनसे आग्रह किया गया है कि वह रूपाणी सरकार को संसदीय सचिवों की नियुक्ति की इजाजत नहीं दें। उन्होंने कहा कि समझा जाता है कि रूपाणी सरकार के भीतर अंदरूनी नाराजगी के चलते यह कुछ विधायकों को संसदीय सचिव बनाने पर विचार कर रही है। अब जंबो मंत्रिमंडल भूतकाल की बात हो चुके हैं क्योंकि संसद ने पहले ही कानून बना कर मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित कर दी है।

ज्ञातव्य है कि 182 सदस्यीय विधानसभा में पिछली बार के 115 की तुलना में मात्र 99 सीटे जीत कर कमजोर तरीके से सत्ता में आई भाजपा के कुल 20 मंत्रियों ने (मुख्यमंत्री समेत) शपथ ली थी। अब भी सात मंत्रियों को सरकार में शामिल किया जा सकता है। पर सरकार की शुरूआत के साथ ही मंत्री पद को लेकर कई वरिष्ठ विधायकों में असंतोष की सुगबुगाहट के बीच सरकार के पिछली बार की तरह 11 संसदीय सचिवों की भी नियुक्ति करने की अटकले लगायी जा रही हैं।

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