भारत आसियान रिश्तों में समुद्र सहयोग को अहम बताते हुए केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह ने आज कहा कि यह भारत – प्रशांत क्षेत्र के भविष्य का रूख तय करेगा और सामरिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

‘ आसियान – भारत समुद्र सहयोग को मजबूत ’ करने की थीम पर आधारित दिल्ली वार्ता (दिल्ली डायलॉग) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत की नई एक्ट ईस्ट नीति ज्यादा परिणामोन्मुख और कार्य आधारित है जो पुरानी नीति लुक ईस्ट से अलग है।

इस सत्र का आयोजन विदेश मंत्रालय ने किया है। भारत – आसियान समुद्री सहयोग के संदर्भ में विदेश राज्य मंत्री ने कहा , ‘‘ हमारा दृढ़ता से मानना है कि यह इस सहयोग का विचार है जो भारत – प्रशांत क्षेत्र के भविष्य का रूख तय करेगा। इससे हमारे लोगों के कल्याण और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा और ऐसे समंदर मिलेंगे जो सुरक्षित और सबके लिए स्वतंत्र होंगे। ’’

भारत इंडोनेशिया , वियतनाम , थाईलैंड और सिंगापुर जैसे आसियान के कई देशों के साथ मजबूत समुद्र सहयोग साझा करता है।

मई में , भारत और इंडोनेशिया ने ‘‘ भारत – प्रशांत क्षेत्र में भारत – इंडोनेशिया समुद्र सहयोग के साझा दृष्टिकोण ’ को सामने रखा था और समुद्र सहयोग को बढ़ाने का संकल्प लिया था।

सिंह ने रेखांकित किया कि एक्ट ईस्ट नीति भौगोलिक दृष्टि से व्यापक है और यह आसियन को केंद्र में रखते हुए समूचे एशिया – प्रशांत क्षेत्र को कवर करती है।

मंत्री ने कहा कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास सरकार की प्राथमिकता है और एक्ट ईस्ट नीति सिर्फ एक प्रगति नहीं है बल्कि यह लुक ईस्ट नीति का अगला कदम है जिसका अब तक अनुसरण किया गया।

उन्होंने कहा कि एक्ट ईस्ट नीति की तवज्जो सिर्फ आर्थिक एकीकरण की ही नहीं है बल्कि इसमें राजनीतिक और सामाजिक – सांस्कृतिक वार्ता को गहराई तक ले जाना भी है। हम विकास के एक नए प्रतिमान को देख रहे हैं जिसमें विदेश नीति की पहलों का मिश्रण है।

इसमें मेघालय के मुख्यमंत्री सी संगमा , त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब , मिजोरम के मुख्यमंत्री लाल थनहवला और अरूणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री चोवना मेन ने भी भाग लिया।