कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति के लिए भारत निभा सकता है अहम भूमिका – दक्षिण कोरिया


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दक्षिण कोरिया ने आज कहा कि भारत कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति लाने की दिशा में किए जा रहे काम में ‘ अहम ’ भूमिका निभा सकता है। इसने भारत से उत्तर कोरिया को मनाने का आग्रह किया ताकि वह अपनी रणनीति की समीक्षा करके उसे परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में लेकर जाए।

कोरिया गणतंत्र की उप विदेश मंत्री एन्ना पार्क ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई अगले महीने की शुरुआत में भारत आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता में दोनों नेता अपनी पहल क्रमश: ‘ सदर्न नीति ’ और ‘एक्ट ईस्ट नीति ’ पर चर्चा कर उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास करेंगे।

उनकी टिप्पणी की अहमियत इसलिए है , क्योंकि पिछले हफ्ते सिंगापुर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी जिसमें किम ने अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी के बदले ‘ पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण ’ की दिशा में काम करने का संकल्प लिया था।

उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा , ‘‘ अमेरिका – उत्तर कोरिया की शीर्ष स्तरीय वार्ता एक ऐतिहासिक बैठक थी। उन्होंने एक दूसरे के प्रति विश्वास बहाली शुरू की है , बातचीत शुरू की और माहौल बनाया। हमें इस ऐतिहासिक प्रगति को जाया नहीं जाने देना चाहिए और इस शांति पहल को कामयाब बनाने की दिशा में साथ काम करना चाहिए। ’’

उनसे जब पूछा गया कि कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति लाने की इस कोशिश में सोल के मुताबिक भारत किस प्रकार भूमिका निभा सकता है तो एन्ना ने कहा कि भारत की भूमिका अहम है क्योंकि हमने समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पूर्ण समर्थन मांगा है जिसमें भारत भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि भारत सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर , अंतरराष्ट्रीय नजरिए को तय करने में एक प्रभावी भूमिका निभा सकता है। और अगर अंतरराष्ट्रीय नजरिया दक्षिण कोरिया की शांति पहल का समर्थन करता है तो यह हमारी पहल का प्रभावी तरीके से समर्थन होगा।

उप विदेश मंत्री ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत उत्तर कोरिया को मनाए कि वह अपनी रणनीति की समीक्षा करके उसे परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ले जाने का फैसला करे।

भारत ने अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच शिखर बैठक का स्वागत करते हुए इसे ‘ सकारात्मक घटनाक्रम ’ बताया था और कहा था कि भारत ने वार्ता और कूटनीति के माध्यम से कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता लाने के सभी प्रयासों का हमेशा समर्थन किया है।

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