मोहम्मद अली जिन्ना को ‘‘स्पष्टवादी हस्ती’’ करार देते हुए इतिहासवेत्ता और लेखक रामचन्द्र गुहा ने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक एक बिंदु वाले एजेंडा पर चलने वाले ‘‘दक्ष नेता’’ थे।

गुहा ने स्वीकार किया कि उनकी नई किताब ‘‘गांधी : द ईयर्स दैट चेंज्ड द वर्ल्ड, 1914-1948’’ ‘‘सहानुभूतिपूर्ण नहीं है।’’ उस समय के सभी नेताओं के बीच जिन्ना के व्यक्तित्व में खामियों को गुहा ने नजरअंदाज किया होगा।

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गुहा ने कहा, ‘‘1930 के दशक की शुरुआत से ही जिन्ना का एकमात्र एजेंडा था — पाकिस्तान का निर्माण हो जिसका नेता मैं बनूं।’’

उन्होंने कहा कि इसलिए उस मायने में वह ‘1930 के बाद से अपेक्षाकृत स्पष्टवादी थे’ जब उनकी ‘ नई इच्छा’ हुई कि एक नये देश का निर्माण किया जाए जिसके वह नेता बनें। वह पाकिस्तान के कायदे आजम की तुलना भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ मायने में आप उनकी (जिन्ना) तुलना अमित शाह से कर सकते हैं क्योंकि वह कहते हैं, ‘जो भी हो मैं चुनाव जीतूंगा’ और जिन्ना कहते थे ‘जो भी हो मैं पाकिस्तान लेकर रहूंगा चाहे इसके लिए लाशें बिछ जाएं।’’

1100 से अधिक पन्ने की किताब में गांधी के दक्षिण अफ्रीका छोड़ने से लेकर 1948 में उनकी हत्या तक का वर्णन है।