जज बीएच लोया की मौत की जांच की मांग पर चल रही सुनवाई में सोमवार को वकीलों के बीच गरमागरमी हो गई। न्यायमूर्ति चंद्रचृड़ को कहना पड़ा कि सुप्रीम कोर्ट में बहस का स्तर ‘मछली-बाजार’ तक न लाया जाए। वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे और पल्लव सिसोदिया के बीच मामले को लेकर इस हद तक कहासुनी हुई कि बात एक दूसरे के नरक-स्वर्ग में जाने तक जा पहुंची। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चेतावनी दी। जस्टिस लोया की मौत की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग पर सोमवार को सुनवाई हो रही थी।

पहले कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला के वकील वी. गिरि ने बहस की। उन्होंने महाराष्ट्र के इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में खामियां उजागर करते हुए कोर्ट से मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की मांग की। उसके बाद महाराष्ट्र के पत्रकार बीएस लोने की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पल्लव सिसोदिया बहस के लिए खड़े हुए। लोने ने भी अपनी याचिका में स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग कीपल्लव सिसोदिया ने कोर्ट से कहा कि उन्होंने दो समाचार पत्रों में घटना के संबंध में अलग-अलग रिपोर्ट आने पर मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए जांच की मांग की थी।

याचिकाकर्ता बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के वकील दुष्यंत दवे ने वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि साल्वे पहले अमित शाह के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश हो चुके हैं, ऐसे में वो महाराष्ट्र सरकार की ओर से अब पेश नहीं हो सकते हैं। दवे ने यह आरोप भी लगाया कि याचिकाकर्ता बीरआर लोने का असल उद्देश्य बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराना था। सिसोदिया ने दवे के आरोपों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ये न्यायपालिका की छवि नुकसान पहुंचाने जैसा है।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कोर्ट में ऊंची आवाज में आरोप-प्रत्यारोप पर नाराजगी जताई और दोनों पक्षों से कहा कि कोर्ट की गरिमा का ध्यान रखें। अदालत को मछली बाजार ना बनाएं और कम से कम अदालत में लगीं पूर्व न्यायविदों की तस्वीरों का ही ख्याल कर लें। बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के वकील दुष्यंत दवे ने कोर्ट से मांग की कि हरीश साल्वे और पल्लव सिसोदिया को मामले में पेश होने से रोका जाए। और अलग से एक याचिका दायर कर लोया मामले के गवाहों को क्रॉस एग्जामिन करने की मांग करेंगे।

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