दिल्ली के गवर्नर अनिल बैजल के आवास पर पिछले 9 दिनों से बैठे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना धरना खत्म कर दिया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेस में इसकी जानकारी दी।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि अपील के बाद यह देखने मे आया है की आज मंत्रियों द्वारा बुलाने पर कई अधिकारी बुलाने पर आए हैं। हमारी कोई अधिकारियों से लड़ाई थोड़े ही थी। आज अधिकारी कुछ ऐसा संकेत दे रहे हैं की उन्हें ऊपर से आदेश मिल गया है की अब मंत्रियों के साथ मीटिंग में जाया करें, यह अच्छी बात है।

आगे सिसोदिया ने कहा कि हमारी कोई अधिकारियों से लड़ाई थोड़े ही थी। आज अधिकारी कुछ ऐसा संकेत दे रहे हैं की उन्हें ऊपर से आदेश मिल गया है की अब मंत्रियों के साथ मीटिंग में जाया करें। यह अच्छी बात है। अधिकारी आज मीटिंग में आये उम्मीद है कल भी आएंगे। राशन की बात हम जनता के बीच करेंगे, @ArvindKejriwal अब LG हाउस से बाहर आएंगे। ये धरना नही था, हम LG साहब से मिलने के लिए इंतज़ार कर रहे थे।

आपको बता दे कि इन सबके बीच धरने के 9वें दिन राज्यपाल अनिल बैजल ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। अनिल बैजल ने चिट्ठी लिखकर दिल्ली के सीएम से अनुरोध किया है कि वह तत्काल सचिवालय में आईएएस अधिकारियों के साथ बैठक करें. लेफ्टिनेंट गवर्नर ने कहा कि दोनों पक्ष आपस में बातचीत करके अपने मतभेदों को दूर करें, यही दिल्ली की जनता के हित में होगा।

बता दें कि AAP सरकार ने अपनी तरफ से अफसरों को सुरक्षा की गारंटी दी है, जिसका आईएएस अफसरों ने स्वागत किया है। अब गेंद उपराज्यपाल अनिल बैजल के पाले में है, क्योंकि दिल्ली सरकार चाहती है कि आईएएस अफसरों के साथ उनकी मीटिंग उपराज्यपाल के सामने हो जिससे दोनों पक्ष (सरकार और उपराज्यपाल) जिम्मेदारी को लेकर आश्वासन दें सकें।इसके लिए मनीष सिसोदिया ने सोमवार को एलजी के नाम पत्र भी लिखा था।

उधर , उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों द्वारा उपराज्यपाल कार्यालय के भीतर दिये जा रहे धरने को ‘ असंवैधानिक ’ घोषित करने का निर्देश दिए जाने के लिये दायर याचिका पर शीघ्र सुनवाई से आज इंकार कर दिया।

केजरीवाल और उनके मंत्री अपनी मांगों के समर्थन में 11 जून की शाम से उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में धरना दे रहे हैं। इनकी मांगों में आईएएस अधिकारियों को अपनी हड़ताल खत्म करने का निर्देश देने और काम रोकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी शामिल है।

न्यायमूर्ति एस एस नजीर और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की अवकाश कालीन पीठ ने कहा कि ग्रीष्मावकाश के बाद यह याचिका सूचीबद्ध की जायेगी।

याचिकाकर्ता हरि नाथ राम के वकील शशांक सुधि ने इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुये कहा कि उपराज्यपाल के कार्यालय के भीतर मुख्यमंत्री के ‘ असंवैधानिक और गैरकानूनी ’ धरने के कारण संवैधानिक संकट पैदा हो गया है।

सुधि ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने कल इस मामले में सुनवाई की थी और अब यह प्रकरण 22 जून के लिये सूचीबद्ध है। उन्होंने कहा कि गंभीर जल संकट की वजह से राजधानी ‘‘ आपात स्थिति ’ का सामना कर रही है।

इस पर पीठ ने शीघ्र सुनवाई से इंकार करते हुये कहा , ‘‘ हम न्यायालय के अवकाश के बाद इसे सूचीबद्ध करेंगे। ’’

याचिका में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और आप सरकार को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

इसमें केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों की भूख हड़ताल को असंवैधानिक और गैरकानूनी घोषित करने का भी अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता हरि नाथ राम ने याचिका में कहा है कि उपराज्यपाल से सांविधानिक सौदेबाजी के लिये मुख्यमंत्री करदाताओं के धन की बर्बादी कर रहे हैं। यही नहीं , केजरीवाल संविधान के अंतर्गत शपथ लेने के बावजूद देश के मौलिक कानून का ही उल्लंघन कर रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि आमतौर पर कर्मचारी ही मौजूदा कानून के अनुरूप अपनी शिकायतों के समाधान के लिये हड़ताल करते हैं। वैसे भी कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मुख्यमंत्री को हड़ताल करने का अधिकार देता हो।

यही नहीं , सुधि ने दलील दी कि मुख्यमंत्री का दावा है कि आईएएस अधिकारी हड़ताल पर हैं लेकिन उपराज्यपाल कार्यालय का कहना है कि ये अधिकारी अपना काम कर रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री या उपराज्यपाल कार्यालय में से कोई न कोई तो असत्य बोल रहा है। इसलिए इस मामले में गलत जानकारी देने के लिये कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए।

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