केन्द्र ने आज उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली लोकपाल चयन समिति की 19 जुलाई को बैठक हो रही है जिसमें लोकपाल और उसके सदस्यों की नियुक्ति के लिये नामों की सिफारिश के लिये एक तलाश समिति गठित की जायेगी।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ को सरकार ने बताया कि तलाश समिति अपनी प्रक्रिया निर्धारित करेगी और इसके बाद चयन समिति एक समय सीमा निर्धारित करेगी जिसके भीतर उसे लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों के नामों की सिफारिश करनी होगी।

प्रधान मंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति में प्रधान न्यायाधीश , लोकसभा अध्यक्ष , लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता और प्रमुख विधिवेत्ता शामिल हैं। सरकार की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल के इस वक्तव्य के बाद पीठ ने कहा कि चूंकि चयन समिति की बैठक 19 जुलाई को हो रही है , इसलिए वह अभी कोई निर्देश जारी नहीं करेगी। इस मामले में न्यायालय अब 24 जुलाई को आगे विचार करेगा।

शीर्ष अदालत ने आशा व्यक्त की कि 19 जुलाई को चयन समिति अपनी बैठक में तलाश समिति गठित करेगी और उसे अपना काम पूरा करने के लिये एक निश्चित समयावधि निर्धारित करेगी।

इस मामले में सुनवाई के दौरान पीठ ने चयन समिति की बैठक में तलाश समिति के गठन और उसके लिये काम का पैमाना निर्धारित करने संबंधी विचार विमर्श पूरा होने की संभावना के बारे में वेणुगोपाल के संदेह का भी संज्ञान लिया।

गैर सरकारी संगठन कामन काज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण और वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले को समयबद्ध तरीके से करने सहित विभिन्न बिन्दुओं पर एक नोट न्यायालय को दिया। शांति भूषण का कहना था कि चाढ़े चार साल बीत जाने के बावजूद अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं की गयी है।

इस नोट में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि उसे संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अपने अधिकार का इस्तेमाल करके नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिये लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश देना चाहिए।

केन्द्र ने शीर्ष अदालत में दायर अपने हलफनामे में कहा था कि चयन समिति की एक मार्च और दस अप्रैल को बैठकें हुयी थी। इसमें कहा गया है कि चयन समिति ने विधिवेत्ता पी पी राव का पिछले साल 11 सितंबर को निधन होने की वजह से रिक्त पद पर पूर्व अटार्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को नियुक्त किया है।

सरकार ने कहा है कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून , 2013 के प्रावधानों के तहत तलाश समिति में कम से सात सदस्य होंगे। यह पीठ न्यायालय के 27 अप्रैल , 2017 के फैसले के बावजूद लोकपाल की नियुक्ति अभी तक नहीं करने के मामले में गैर सरकारी संगठन कामन काज द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

शीर्ष अदालत ने दो जुलाई को केन्द्र को निर्देश दिया था कि लोकपाल की नियुक्ति के लिये उठाये जाने वाले कदमों के बारे में एक समयबद्ध कार्यक्रम पेश किया जाये।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 27 अप्रैल को अपने फैसले में कहा था कि लोकपाल कानून में प्रस्तावित संशोधन होने तक इसे लागू नहीं करना न्यायोचित नहीं है। इन संशोधनों में लोकसभा में विपक्ष के नेता का मुद्दा भी शामिल है। न्यायालय ने कहा था कि यह कानून कार्यशील है और इसके प्रावधानों को लागू करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालता है।