दिल्ली उच्च न्यायालय ने एयर इंडिया को उसकी एक एयर होस्टेस के यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच कर रही समिति की अध्यक्ष को बदलने को कहा है। अदालत के आदेश के बाद एयरलाइन उनकी जगह एक नये व्यक्ति को लाने के लिए राजी हो गई है। पीड़िता ने एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

एयर इंडिया अपनी आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की अध्यक्ष को बदलने के लिए राजी हो गई है। दरअसल , इससे पहले उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऐसा नहीं किए जाने पर वह समिति के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगा देगा।

न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने कहा कि प्रतिवादी 1 (एयर इंडिया) के वकील ने कहा है कि यदि याचिकाकर्ता को समिति की मौजूदा अध्यक्ष के खिलाफ कोई आशंका है तो प्रतिवादी 1 को याचिकाकर्ता के हित में किसी और महिला को समिति के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त करना चाहिए। अदालत ने एयर होस्टेस की याचिका पर शुक्रवार को यह आदेश दिया और यह टिप्पणी की।

गौरतलब है कि एयर होस्टेस ने अधिवक्ता संजय घोष के मार्फत दायर अपनी याचिका में दूसरी समिति के गठन को इस आधार पर चुनौती दी थी कि इसकी अध्यक्षता कर रही महिला यौन उत्पीड़न के आरोपी अधिकारी की करीबी मित्र हैं।

घोष ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को आशंका है कि जांच की कार्यवाही निष्पक्षता से नहीं हो सकेगी। अपनी याचिका में महिला ने कई उदाहरण दिए , जिनमें आरोपी अधिकारी ने उसके और अन्य महिला कर्मचारियों के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि 2015 में उसने यह विषय एयर इंडिया के तत्कालीन अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के ध्यान में लाया था लेकिन उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने दलील दी कि इस साल उसने नागरिक विमानन मंत्री सुरेश प्रभु को पत्र लिखा और उनके हस्तक्षेप के बाद समिति का गठन किया गया। हालांकि , इस समिति ने करीब छह महीने तक जांच नहीं की और ना ही उसे अपना मामला बयां करने के लिए पर्याप्त वक्त दिया। साथ ही , प्रथम समिति को पुनर्गठित करने के उसके अनुरोध पर भी एयरलाइन ने ध्यान नहीं दिया।

याचिका में कहा गया है कि इसके बाद उसने महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को पत्र लिखा। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद दूसरी समिति का गठन इस साल जून में किया गया , लेकिन इसकी अध्यक्षता एक ऐसी महिला कर रही है जो आरोपी अधिकारी की करीबी हैं।