संसद के आज सम्पन्न हुए मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय पिछड़ वर्ग आयोग (एनसीबीसी) को संवैधानिक दर्जा देने, उच्चतम न्यायालय के फैसले के परिणामस्वरूप कमजोर हुए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण कानून को मूल स्वरूप में लाने और घूस लेने के साथ देने को भी अपराध की श्रेणी में रखने जैसे कुछ महत्वपूर्ण विधेयक पारित किये गये।

अठारह जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिस पर करीब पौने 12 घंटे की चर्चा हुई और अंत में यह गिर गया। छह अध्यादेशों के स्थान पर लाये गये विधेयक भी पारित किये गये, लेकिन तीन तलाक से संबंधित विधेयक एक बार फिर लटक गया। इस सत्र में राज्यसभा ने अपने नये उपसभापति का भी चयन किया।

राज्यसभा में PM मोदी की टिप्पणी को सभापति ने कार्यवाही से हटाया

इस दौरान दोनों सदनों की 17 बैठकें हुईं और दोनों में ही पिछले सत्र की तुलना में बेहतर कामकाज हुआ। लोकसभा में 112 घंटे कामकाज हुआ, यद्यपि व्यवधान के कारण आठ घंटे 26 मिनट का समय बर्बाद भी हुआ। राज्यसभा में 27 घंटे का समय बर्बाद हुआ। दोनों सदनों में 22 विधेयक पेश हुए। लोकसभा ने 21 विधेयक पारित किये, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ 14 का रहा।

दोनों सदनों में पारित विधेयकों में एससी/एसटी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2018, संविधान (123वां संशोधन) विधेयक, 2017, बारह साल से कम उम, की बच्चियों से बलात्कार के मामले में फांसी की सजा के प्रावधान वाला आपराधिक विधि (संशोधन) विधेयक 2018, भगोड़ आर्थिक अपराधी निवारण विधेयक 2018, भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक 2018, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2018 तथा राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय विधेयक 2018 प्रमुख हैं।

इस सत्र में असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ और राफेल रक्षा सौदे को लेकर विपक्ष ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित की।

मुस्लिम महिला संगठनों ने की तीन तलाक रोधी विधेयक की समीक्षा की मांग

सोलहवीं लोकसभा में पहली बार सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जिसपर 11 घंटे 46 मिनट की चर्चा हुई। अंतत: प्रस्ताव नामंजूर हो गया।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडु ने मानसून सत्र के दौरान सदन के कामकाज के सुचारू रूप चलाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि इस दौरान सदन की उत्पादकता 74 फीसदी रही है जो पिछले दो सत्रों की तुलना में बहुत बेहतर है।

वेंकैया नायडु ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले कहा कि 18 दिवसीय इस सत्र में 17 दिन काम काज हुआ। एक दिन गुरू पूर्णिमा का अवकाश रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान पिछले दो सत्रों की तुलना में 114 फीसदी विधायी कार्य हुआ और 14 विधेयक पारित किये गये जिन में एक संविधान संशोधन विधेयक और अनुसूचित जातियां / अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक भी शामिल है।

जेटली किडनी ट्रांसप्लांट के बाद पहली बार राज्यसभा पहुंचे, पीएम मोदी से हाथ मिलाने से किया इनकार!

उन्होंने किसानों की स्थिति और अर्थव्यवस्था पर सदन में चर्चा नहीं होने पर नाराजगी जताते हुये कहा कि सामाजिक न्याय, आंध, प्रदेश पुनगर्ठन अधिनियम के क्रियान्वयन और अमस में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर अल्पकालिक चर्चा की गयी। इस दौरान शून्यकाल में 120 सदस्यों ने अपनी समस्यायें उठायीं और प्रत्येक दिन 12 प्रश्नों के उत्तर पूछे गये तथा इस दौरान विभिन्न समितियों के 146 प्रतिवेदन सदन में पेश किये गये।

उल्लेखनीय है कि उप राष्ट्रपति एवं सभापति के रूप में उनका एक वर्ष का कार्यकाल आज ही पूरा हुआ है। मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा से पहले लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन ने कहा, ‘इस सत्र में लोकसभा ने समाज कल्याण से जुड़ ऐसे विधेयक पारित किये हैं, जिसका व्यापक प्रभाव समाज के वंचित वर्गों के हितों पर पड़ेगा।’

उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान चालू वित्त वर्ष (2018-19) के लिए पूरक अनुदान मांगों एवं 2015-16 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों से संबंधित विनियोग विधेयकों को चार घंटे 46 मिनट से अधिक की चर्चा के बाद पारित कराया गया। इस दौरान 75 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिये गये। शेष 285 तारांकित प्रश्नों के लिखित उत्तर 4,140 अतारांकित प्रश्नों के उत्तरों के साथ सभा पटल पर रखे गये।