जम्मू & कश्मीर में PDP के साथ BJP के गठबंधन तोड़ने के फैसले पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना के 52 वें स्थापना दिवस पर पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर निशाने साधते हुए कहा कि बीजेपी को यह पता होना चाहिए था कि वह जम्मू-कश्मीर में किसके साथ सत्ता में बैठी थी। दुख इस बात का है कि महबूबा सरकार ‘नालायक’ है इसे जानने में बीजेपी को तीन साल लग गए। तीन साल में भारत के 600 से ज्यादा जवान शहीद हो गए। इसके बाद बीजेपी को अक्ल आई है।

उद्धव ठाकरे ने सवाल उठाया कि दहशतगर्दों का कोई धर्म नहीं होता फिर ‘युद्धविराम’ क्यों? उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान में गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली के दौरान ‘युद्धविराम’ नहीं होता तो फिर रमजान में इसकी घोषणा की क्या जरूरत थी।

इससे पहले बीजेपी के गठबंधन तोड़ने के फैसले पर शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘बीजेपी-पीडीपी के अपवित्र गठबंधन को लेकर हमने पहले ही कह दिया था कि यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। यह ऐंटी नैशनल गठबंधन था।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर बीजेपी के नेताओं और पार्टी महासचिव राम माधव ने मंगलवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ राज्य के हालात पर चर्चा की थी। इस बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राम माधव ने ऐलान किया कि बीजेपी ने महबूबा मुफ्ती सरकार से हटने और गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया है। साथ ही समर्थन वापसी की चिट्ठी भी राज्यपाल को भेज दी है। वहीं, बीजेपी के मंत्रियों ने भी अपना इस्तीफा भेज दिया है।

वही , मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मंगलवार को श्रीनगर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। महबूबा ने कहा, ‘मैं बीजेपी के इस फैसले से अचंभित नहीं हूं। हमने पावर के लिए गठबंधन नहीं किया था। इस गठबंधन के कई बड़े मकसद थे। सीजफायर, पीएम का पाकिस्तान दौरा, 11 हजार युवाओं के खिलाफ केस वापस हुए।’ इस दौरान मुफ्ती ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें बताया है कि हम किसी गठबंधन की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं।

उधर, राज्य के अन्य दलों ने भी किसी तरह के गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है. नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर राज्य के राजनीतिक संकट पर चर्चा की। राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की मांग की। उन्होंने कहा नेशनल कांफ्रेंस भी किसी भी दल के साथ ना तो कोई समर्थन लेगी और ना ही समर्थन देगी। 12 विधायकों वाली कांग्रेस ने भी समर्थन से इनकार किया है। राज्य में पीडीपी के 28, बीजेपी के 25, नेशनल कांग्रेंस के 15, कांग्रेस के 12 तथा 7 अन्य विधायक हैं।