लोकसभा में आज अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की आलोचना करते हुए गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने आज कहा कि देश पर शासन कर रहे लोग ऐसे ‘कसाई हैं, जो जानवरों को बचा रहे हैं और इंसानों को मार रहे हैं।’

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘ सामना ’ के संपादकीय में लिखा है , दुनिया में हम पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था बन गए हैं, लेकिन इसने हमारे किसानों को मौत की दहलीज से नहीं बचाया। उसने कश्मीर के सैकड़ों जवानों की शहादत को नहीं रोका।

संपादकीय में सवाल किया गया है कि जिस पांचवें क्रमांक की अर्थव्यवस्था में गरीबों तथा बेरोजगारों को स्थान नहीं है वह अर्थव्यवस्था किस काम की है ? सामना में शिवसेना ने आरोप लगाया है , ‘‘ यहां बकरियों को बचाकर इंसान को मारनेवाले ‘ कसाई ’ राज करते हैं। पूरा संवेदना शून्य कामकाज जारी है। सिर्फ चुनाव जीतने के लिए तथा सत्ता बचाने के लिए नट का खेल करते रहना लोकतंत्र नहीं। बहुमत की झुंडशाही सर्वकाल नहीं टिकती। जनता सर्वोच्च है। ’’

लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज होने वाले मतविभाजन से अनुपस्थित रहने का फैसला करने वाले गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने हालांकि यह भी कहा कि विपक्ष जानता है कि सरकार गिराने लायक आंकड़ा उसके पास भी नहीं है।

पार्टी का कहना है , ‘‘ भाजपा के पास आंकड़ों का बहुमत है इसलिए मतदान के बाद सरकार गिर जाएगी , ऐसा विचार कोई नहीं कर रहा। सोनिया गांधी ने कहा है कि ‘ आंकड़ा हमारे पास भी है। ’ लेकिन सरकार गिराने जितना आंकड़ा उनके पास नहीं है , यह विरोधियों को भी पता है। ’’

उसमें लिखा है , विरोधियों का अविश्वास प्रस्ताव सरकार गिराने के लिए नहीं बल्कि मोदी सरकार को अभियुक्त के पिंजरे में खड़ा करने के लिए है।

सामना ने लिखा है , ‘‘ बहुमत का अर्थ जनभावनाओं की कद्र ना होकर बहुमत वालों की तानाशाही हो गया है। लोगों को सपने दिखाना। श्रद्धा और भावनाओं से खिलवाड़ कर वोट मांगना और लोगों द्वारा झोली भरकर मतदान करने के बाद इन सभी चुनावी जुमलों को कभी भी स्वच्छ न होनेवाली गंगा में डुबो देना है। ’’

शिवसेना ने राजग गठबंधन पर चुटकी लेते हुए लिखा है , अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली तेदेपा कभी राजग का हिस्सा थी। दूध का आंदोलन छेड़ने वाले राजू शेट्टी भी उनके ही पालकी वाहक थे।

अपने बारे में पार्टी ने लिखा है , सभी को छोड़ भी दें तो , 25 वर्ष तक साथ देने वाली शिवसेना पर अविश्वास दिखाकर अब इसके आगे ‘ हमारे हम ही ’ का धमंड दिखाया गया , जो अभी उतरा नहीं है ?

सामना ने लिखा है , देश भर के उपचुनावों में पराभव होते ही खुले पायजामे के नाड़े को कसते हुए ‘ युति ’ का वीणा वादन नए सिरे से शुरू है , लेकिन सच तो यह है कि जरूरत खत्म होते ही साथ छोड़ने की विकृति से किया गया राज लोगों के अविश्वास के ही योग्य है।