नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में एक तरफा सीजफायर के संबंध में केंद्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने राज्य में चल रहे एकतरफा सीजफायर को खत्म कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब एक बार फिर आतंकियों के खिलाफ सेना का ऑपरेशन शुरु होगा। रमजान के मौके पर जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती के कहने पर सरकार ने राज्य में एकतरफा सीजफायर किया था। जो अब खत्म हो चुका है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को ईद के दिन कहा था कि आप लोगों को रविवार का इंतजार करना पड़ेगा।

इस एक महीने के सीजफायर के दौरान आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑल आउट को भी रोक दिया गया था। लेकिन अब ऑपरेशन ऑलआउट दोबारा शुरु होगा। इस एक महीने के सीजफायर का आतंकियों और पाकिस्तान ने काफी फायदा उठाया। इस दौरान एक दिन भी ऐसा नहीं रहा जब आतंकियों ने वारदात को अंजाम देने की कोशिश नहीं की हो।

पाकिस्तान ने भी रमजान के दौरान कई बार सीजफायर का उल्लंघन किया। पाकिस्तान की तरफ से बड़े पैमाने पर सीमापार से गोलीबारी की गई। जिसमें कई भारतीय जवान शहीद हुए। हलांकि सेना ने भी पाकिस्तान की इस हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया।

सीज फायर के दौरान ही आतंकियों ने राष्ट्रीय रायफल के जवान औरंगजेब को अगवा कर उसकी हत्या कर दी। सीजफायर में ही आतंकियों ने राइजिंग कश्मीर के संपादक सुजात बुखारी की हत्या कर दी। इसके अलावे आतंकियों ने घाटी में कई जगहों पर सेना के काफिले पर हमला भी किया था।

सीजफायर के दौरान पत्थरबाजी में भी कोई कमी नहीं आई थी। हद तो तब हो गई जब ईद के मौके पर कश्मीर में पत्थरबाजों ने आईएसआईएस और पाकिस्तान का झंडा लहराया और सेना पर पत्थर बरसाए।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने मांग की थी कि कम से कम रमजान के पवित्र महीने में सुरक्षाबलों को कार्रवाई करने से रोकना चाहिए। ये बात अलग है कि महबूबा की मांग पर विरोध भी हुआ था। लेकिन केंद्र सरकार ने घाटी में अमन बहाली की दिशा में एकतरफा सीजफायर का ऐलान किया था।

गृहमंत्री ने कहा कि एकतरफा सीजफायर के दिनों में सुरक्षाबलों से आत्मसंयम का परिचय दिया जो सराहनीय है। रमजान के दिनों में सुरक्षाबलों पर हमले किए गए लेकिन जवानों ने गंभीरता के साथ अपने कर्तव्यों के निर्वहन में जुटे रहे।

सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि जम्मू-कश्मीर में अमन चैन स्थापित हो। राज्य में भयमुक्त माहौल बनाने के लिए केंद्र की तरफ से लगातार कोशिश जारी है।

रमजान के पवित्र महीने में आतंकी अपनी नापाक हरकत को अंजाम देने से बाज नहीं आए। घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में थोड़ी सी कमी जरूर दर्ज हुई। लेकिन दो घटनाओं ने ये सोचने को मजबूर कर दिया कि सुरक्षाबलों द्वारा कार्रवाई न करने से आतंकियों का हौसला बढ़ रहा है। राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी और राइफलमैन औरंगजेब की हत्या के बाद ये आवाज उठने लगी कि एकतरफा सीजफायर का अब कोई अर्थ नहीं रह गया है। केंद्र सरकार भी अलग अलग संगठनों की तरफ से सीजफायर खत्म करने का दबाव बढ़ गया था।

 

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