सरकार हर मोर्चे पर विफल : कांग्रेस


नई दिल्ली : महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के लिए किए गए वादों को पूरा करने में नरेन्द्र मोदी सरकार के बुरी तरह विफल रहने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस की शीर्ष निकाय सीडब्ल्यूसी ने देश में ‘भय का माहौल तैयार होने पर’ पर आज गहरी चिंता जतायी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा ए.के. एंटनी, पी. चिदंबरम, गुलाम नबी आजाद सहित विभिन्न वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। बैठक में श्रीमती सोनिया गांधी ने आक्रामक रुख अपनाया और जम्मू-कश्मीर के बढ़ते संकट को मोदी सरकार की विफलता बताया। साथ ही रोजगार के अवसर नहीं बढऩे तथा मीडिया सहित विरोध के स्वरों को कथित रूप से दबाये जाने के मुद्दों पर पार्टी नेताओं ने विचार-विमर्श के दौरान गहरी चिंता जतायी। बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया ने कहा, ”सबसे बुरी बात है कि महिलाएं, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक एवं अन्य उत्पीडि़त वर्ग संकटपूर्ण समय का सामना कर रहे हैं।

विभाजनकारी मुद्दों को हवा दी जा रही है तथा जो लोग अन्य मत या विचार रखते हैं उनके जीवनयापन एवं खानपान की आदतों पर हमला किया जा रहा है।” उन्होंने कहा, ”यह सरकार उन लोगों की आवाज दबाने के लिए राज्य की शक्ति का प्रयोग कर रहे हैं जो अलग विचार व्यक्त कर रहे हैं या वैकल्पिक नीतियां एवं दर्शन की बात कर रहे हैं। भले ही वे राजनीतिक नेता, संस्थान, छात्र, सिविल सोसाइटी हो या मीडिया हो, असहिष्णुता बढ़ रही है तथा कानून की खुलेआम अनदेखी कर अलग स्वरों में बोलने वाले लोगों को पीडि़त किया जा रहा है।” सोनिया ने कहा कि भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार देने वाली घटनाओं का बढऩा बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का संकट इस सरकार की भारी विफलता का परिणाम है। सीमापार आतंकवाद में वृद्धि हो रही है। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संवेदनहीन ढंग से स्थिति से निपटने के कारण स्थानीय आबादी विशेषकर युवक अलग-थलग महसूस और क्रुद्ध हो रहे हैं। बैठक को संबोधित करते हुए मनमोहन ने कहा कि नोटबंदी के कारण भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है। बैठक में मनमोहन ने कहा, ”भारत के गत वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2016-17 के जीडीपी आंकड़े कुछ दिन पहले जारी किए गए। भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है, मुख्यत: नवंबर 2016 में की गयी नोटबंदी घोषणा के कारण।” उन्होंने कहा, ”आर्थिक गतिविधियों को बताने वाला वास्तविक उप माप सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में भारी और निरंतर कमी आई है। निजी क्षेत्र का निवेश ध्वस्त हो गया है तथा अर्थव्यवस्था एकमात्र सार्वजनिक व्यय से चल रही है। उद्योगों का जीवीए जो मार्च 2016 में 10.7 प्रतिशत था वह मार्च 2017 में घटकर 3.8 प्रतिशत रह गया। इसमें करीब सात प्रतिशत की गिरावट आई।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन को सबसे चिंताजनक पहलु बताया। उन्होंने कहा, ”इसमें सबसे चिंताजनक बात रोजगार सृजन का प्रभाव है। देश के युवाओं के लिए रोजगार मिलना बहुत कठिन हो गया है। देश में सबसे अधिक रोजगार सृजन करने वाला निर्माण उद्योग सिकुड़ रहा है। इसका मतलब है कि देश में लाखों नौकरियां खत्म हो रही हैं।” बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाब नबी आजाद ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनावों को लेकर भी चर्चा हुई। कांग्रेस अध्यक्ष की इस बारे में विपक्ष के विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बैठक हुई थी। विपक्षी नेताओं का मानना है कि राष्ट्रपति पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठना चाहिए जो संविधान की रक्षा कर सके।

आजाद ने बताया कि राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनावों के बारे में विचार के लिए एक उप समूह बनाया गया है। इस समूह की अगले सप्ताह बैठक होगी। सीडब्ल्यूसी की बैठक में संगठनात्मक चुनावों के कार्यक्रम को भी मंजूरी दी गई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं को 2019 के आम चुनावों के लिए सतर्क रहने को कहा। उन्होंने कहा, ”हम 2019 के चुनावों से बहुत दूर नहीं हैं। हमें भारत की मूल आत्मा और विचार की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए जिसे यह सरकार मिटाने का प्रयास कर रही है।”