उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती से उनके आवास जाकर मुलाकात की। मायावती ने मंगलवार को बसपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में ऐलान किया था कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ किसी भी दशा में गठबंधन नहीं करेगी।

सपा-बसपा गठबंधन की नेता ने दोनो दलों के कार्यकर्ताओं को आगाह किया था कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी वाड्रा के महासचिव नियुक्त किये जाने के बाद वे कांग्रेस के हर एक कदम पर पैनी निगाह बनाये रखें। बसपा प्रमुख के माल एवन्यू स्थित बंगले पर अखिलेश यादव बुधवार शाम को पहुंचे जहां दोनो नेताओं के बीच करीब आधा घंटा बातचीत हुई।

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इस बैठक के बाद कयास लगाये जा रहे है कि सपा-बसपा गठबंधन अमेठी और रायबरेली में भी अपना उम्मीदवार उतार सकता है। इसके अलावा सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि यह मुलाकात आगामी लोकसभा चुनाव के लिए होने वाली रैलियों, सभाओं और बैठकों के सिलसिले में थी। उन्होंने बताया कि चुनाव करीब आ रहे हैं। होली के बाद चुनाव प्रचार की पूर्णतया शुरूआत कर दी जाएगी।

चंद्रशेखर रावण लड़ेंगे पीएम मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव

वही, प्रियंका वाड्रा ने बुधवार को ही दलित वर्ग की नुमाइंदगी करने वाले भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर से मुलाकात कर नए राजनीतिक समीकरण के संकेत दिये थे जिसके बाद माना जा रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ साथ कांग्रेस के खिलाफ भी आक्रामक रवैया अपना सकता है।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती भीम सेना के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण से मिलने गई थी जहां उन्होने चंद्रशेखर को बिजनौर जिले की नगीना (सुरक्षित) लोकसभा सीट से कांग्रेस के समर्थन से उतरने का प्रस्ताव दिया हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नही हो सकी है।

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सूत्रों के अनुसार बसपा प्रमुख ने लोकसभा चुनाव में नगीना (सु) से चुनाव लड़ने का मन बनाया था। सपा के सूत्रों ने बताया कि चंद्रशेखर यदि कांग्रेस महासचिव के प्रस्ताव को स्वीकार करते है तो यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा की राह मुश्किल करेगा। विशेषकर सहारनपुर और मेरठ मंडल में भीम आर्मी की खिलाफत गठबंधन के लिये मुश्किले खड़ी कर सकता है।

सहारनपुर से सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा “मेरे पास कोई वैध आंकड़ा तो नही है लेकिन अपने कानो से सुने तथ्यों के आधार पर मै कह सकता हूं कि चंद्रशेखर की भीम आर्मी बसपा सपा के दलित मुस्लिम गठजोड़ पर गहरी चोट पहुंचा सकती है। हो सकता है कि उसे जीत नही मिल सके लेकिन वह सपा बसपा गठबंधन के प्रत्याशियों को हराने की कुव्व्त रखता है।” बिजनौर जिले में सपा और बसपा की गहरी पकड़ है। पिछले साल नूरपुर विधानसभा के उपचुनाव में बसपा की मदद से सपा प्रत्याशी ने भाजपा को पटखनी दी थी।