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पंचों की बैठक में फैसला- नरेंद्र गिरी के उत्तराधिकारी के रूप में बलबीर गिरि संभालेंगे बाघम्बरी मठ की गद्दी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने गुरुवार को कहा कि अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी के रूप में महंत बलबीर गिरि बाघंबरी मठ की गद्दी संभालेंगे। निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी ने इसकी औपचारिक रूप से घोषणा की।महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि बाघंबरी मठ में संचालन के लिए बोर्ड बनाया जा रहा है। यह बोर्ड अखाड़े के हित और मर्यादा में कार्य करवाने के लिए बनाया जा रहा है। जिसमें पांच संत शामिल होंगे।

श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की षोडशी भंडारे से पहले बोर्ड का गठन होगा

उन्होंने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की षोडशी भंडारे से पहले बोर्ड का गठन होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गुरुवार को निरंजनी अखाड़े में अखाड़े के पंचों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। 35 साल के बलबीर गिरि पिछले 15 सालों से महंत नरेंद्र गिरि के सबसे भरोसेमंद शिष्य हैं। वह उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं और 2005 में संन्यास लेने के लिए उन्होंने अपने परिवार को छोड़ दिया था। उन्हें हरिद्वार में नरेंद्र गिरि द्वारा दीक्षा दी गई और वर्तमान में वे हरिद्वार में बिल्केश्वर महादेव मंदिर की देखरेख कर रहे हैं।

जांच के लिए अखाड़ा परिषद रिटायर्ड हाईकोर्ट के जजों का पैनल कर सकती है नियुक्त

वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) के महासचिव महंत हरि गिरि ने कहा है कि अखाड़ा परिषद महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जांच के लिए उच्च न्यायालय के पांच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलाकर एक अलग जांच पैनल नियुक्त कर सकती है। महंत ने कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर सभी वरिष्ठ संतों की सुरक्षा से जुड़ा है।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत आत्महत्या से नहीं हुई थी

जूना अखाड़े के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरि ने दोहराया कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत आत्महत्या से नहीं हुई थी। गिरि ने कहा, "सीबीआई जांच का नतीजा जो भी हो, मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि महंत नरेंद्र गिरि, जो 30 साल से अधिक समय से मेरे करीबी सहयोगी रहे हैं, आत्महत्या कर सकते हैं।"

कोई कैसे पचा सकता है कि इतनी क्षमता का एक व्यक्ति ऐसा कदम उठा सकता है

उन्होंने कहा कि "कोई कैसे पचा सकता है कि इतनी क्षमता का एक व्यक्ति ऐसा कदम उठा सकता है? इस वजह से, हमें लगता है कि कहानी के लिए और भी बहुत कुछ है जिसके लिए एक गहरी जांच की आवश्यक है। अतीत में, चार संतों की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो चुकी है और नरेंद्र गिरि को छोड़कर, कोई जांच नहीं हुई है। क्या हुआ, यह जानने में किसी की दिलचस्पी नहीं है।"

एक अखाड़ा दूसरे अखाड़े के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं

निरंजनी अखाड़े के बलबीर गिरि को नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी बनाए जाने के मुद्दे पर हरि गिरि ने इसे एक अखाड़े का अंदरूनी मामला बताया। उन्होंने कहा, "यह हमारी प्रथा है कि एक अखाड़ा दूसरे अखाड़े के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं। भले ही उनके (नरेंद्र गिरि के) शिष्य को बाघंबरी मठ का मुखिया बनाया जा रहा है, लेकिन निरंजनी अखाड़े में मौत के पीछे की सच्चाई का पता लगाना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।"

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