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UP जनसंख्या नियंत्रण बिल पर सलमान खुर्शीद का बयान-मंत्रियों के जायज और नाजायज बच्चों की हो गिनती

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। ड्राफ्ट के अनुसार, प्रदेश में दो से ज्यादा बच्चों वाले माता-पिता को कई सुविधाओं से वंचित रखा जाएगा। योगी सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सरकार से इस कानून को लाने से पहले उनके मंत्रियों के जायज और नाजायज बच्चों की जानकारी साझा करने को कहा है।

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने रविवार को कहा, योगी सरकार को पहले ये सूचना देनी चाहिए कि हमारे मंत्रियों के कितने बच्चे हैं। उसके बाद उन्हें ये कानून लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा, मंत्रियों के जायज और नाजायज बच्चों की भी गिनती होनी चाहिए। 

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उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर तैयार ड्राफ्ट के तहत जिनके पास दो से अधिक बच्चे होंगे, वे न तो सरकारी नौकरी के लिए योग्य होंगे और न ही कभी चुनाव लड़ पाएंगे। वहीं 77 सरकारी योजनाओं व अनुदान का लाभ भी नहीं मिलेगा। ड्राफ्ट में स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ने समेत कई तरह के प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। 

अगर इस ड्राफ्ट को लागू किया जाता है तो इसके लागू होने के एक साल के अंदर सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा। इसके अलावा स्थानीय निकाय में चुने जनप्रतिनिधियों को शपथ पत्र देना पड़ेगा। वह इसका उल्लंघन नहीं करेंगे। 

कानून लागू होते वक्त उनके दो ही बच्चे हैं, शपथ पत्र देने के बाद अगर तीसरी संतान पैदा करते हैं तो प्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द करने का प्रस्ताव है साथ ही चुनाव ना लड़ने का प्रस्ताव भी देना होगा। वहीं, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रमोशन और बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है। 

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ड्राफ्ट में अनुसार, एक बच्चे की नीति अपनाने वाले माता-पिता को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। अगर परिवार के अभिभावक सरकारी नौकरी कर रहे हैं और नसबंदी कराते हैं तो उन्हें इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट जैसी कई सुविधाओं का लाभ मिलेगा।  

दो बच्चों वाले माता-पिता अगर सरकारी नौकरी नहीं करते हैं तो उन्हें बिजली-पानी, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट समेत कई अन्य सुविधाएं देने का प्रस्ताव है। एक बच्चे और खुद नसबंदी कराने वाले दंपती को संतान के 20 वर्ष के होने तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा शिक्षण संस्था व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है।