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UP के 24 जिलों में बाढ़ का प्रकोप, CM योगी ने हवाई सर्वेक्षण करके लिया हालात का जायजा

देश में मॉनसून के साथ ही बारिश का ऐसा सिलसिला शुरू होता है, जो लोगों पर कहर बन कर टूटता है। मॉनसून लोगों को राहत देने के बजाए उनके लिए आफत का पहाड़ बन जाता है। उत्तर प्रदेश में व्यापक वर्षा और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण कई नदियां उफान पर हैं और राज्य में 24 जिलों के 600 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को बाढ़ से प्रभावित जालौन और हमीरपुर के सैलाबग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य के निर्देश दिए। राहत आयुक्त कार्यालय से बुधवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के हमीरपुर, बांदा, इटावा, जालौन, वाराणसी, कौशांबी, चंदौली, हाजीपुर, औरैया, कानपुर देहात, प्रयागराज, फर्रुखाबाद, आगरा, बलिया, मिर्जापुर, गोरखपुर, सीतापुर, मऊ, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, बहराइच, गोंडा, कानपुर नगर और फतेहपुर के 605 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
हमीरपुर के सबसे ज्यादा 75 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इसके अलावा, बांदा के 71 तथा इटावा और जालौन के 67-67 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। प्रदेश के बाढ़ प्रभावित 110 गांवों का संपर्क अन्य क्षेत्रों से कट गया है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालौन और हमीरपुर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों के साथ बैठक में बाढ़ की स्थितियों की समीक्षा करके आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापक वर्षा के कारण गंगा, यमुना, शारदा, बेतवा तथा क्वानो नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंगा नदी कचला ब्रिज (बदायूं), फाफामऊ (प्रयागराज), प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर तथा बलिया में खतरे के निशान को पार कर गई है और बलिया को छोड़कर बाकी स्थानों पर इसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
इसके मुताबिक, यमुना नदी औरैया, जालौन, हमीरपुर, चिल्ला घाट, बांदा तथा नैनी (प्रयागराज) में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बेतवा नदी सहिजना (हमीरपुर) में, शारदा नदी पलिया कलां (लखीमपुर खीरी) में और कुआनो नदी चंद्रदीप घाट (गोंडा) में लाल निशान को पार कर गई है।
राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, प्रदेश में कुल 940 राहत शिविरों की स्थापना की गई है। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाने तथा राहत सामग्री पहुंचाने के लिए कुल 1463 नाव का प्रयोग किया जा रहा है। राज्य में बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए 1125 चौकियां स्थापित की गई हैं। बाढ़ क्षेत्रों में चिकित्सीय सहायता के लिए कुल 504 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। अब तक 536 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
प्रदेश में बाढ़ प्रभावित विभिन्न जिलों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), एसडीआरएफ और पीएसी की कुल 59 टीमें तैनात की गई हैं। आंचलिक मौसम केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कुछ इलाकों में वर्षा हुई। इस दौरान, फूलपुर (प्रयागराज) में सबसे ज्यादा 17 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

इसके अलावा मऊ तहसील (चित्रकूट) में 16, कुंडा (प्रतापगढ़) में 15, छतनाग (प्रयागराज) में 13, बारा (प्रयागराज) में 12, प्रयागराज, फाफामऊ (प्रयागराज), करछना (प्रयागराज) तथा चायल (कौशांबी) में 11-11, मेजा (प्रयागराज), सिराथू (कौशांबी), बस्ती, भानपुर (बस्ती) तथा डलमऊ (रायबरेली) में नौ-नौ, भिनगा (श्रावस्ती), हंडिया (प्रयागराज) और सोरांव (प्रयागराज) में आठ-आठ, प्रतापगढ़, रानीगंज (प्रतापगढ़), तुरती पार (बलिया), लखनऊ तथा लंभुआ (सुलतानपुर) में सात-सात सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के पूर्वी हिस्सों में अनेक स्थानों पर तथा पश्चिमी भागों में कुछ जगहों पर वर्षा होने का अनुमान है।