वाराणसी : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कृत को‘देववाणी’बताते हुए रविवार को यहां कहा कि यह भाषा भारत के‘डीएनए’में है,जो विज्ञान के आगे का मार्ग प्रशस्त करती है। ‘संस्कृत भारती’के दो दिवसीय‘अखिल भारतीयोपवेशनम्’के समापन समारोह में श्री योगी ने कहा कि भारत या फिर विश्व मानवता के कल्याण का मार्ग संस्कृत से प्रशस्त होगा क्योंकि संस्कृत भाषा को‘देववाणी’का दर्जा प्राप्त है। महमूरगंज के निवेदिता शिक्षा सदन सभागार में देशभर से आये सैकड़ संस्कृत प्रेमियों एवं विद्वानों से संस्कृत भाषा के जन-जन तक पहुंचाने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कहीं न कहीं हम सब के बीच संवादहीनता की स्थिति रही है, जिसे समझना और दूर करना अत्यंत आवश्यक है।

योगी ने कहा, ‘देश के सबसे बड़ राज्य उत्तर प्रदेश के संस्कृत के विद्यालयों को देखता हूं तो चिंता होती है। यही वजह है कि उन्होंने संस्कृत संस्थानों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरु की तो एक ही लक्ष्य दिया तथा संबंधित पक्षों से कहा कि जब तक मैं हूँ फंड की चिंता नहीं जाये, संस्कृत के विकास के लिए तमाम जरूरी उपाय किये जाएं।’ उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए हमें संस्कृत को समझना होगा। आधुनिकता की पीछे-पीछे भागने तथा परंपरा से मुंह मोड़ने के दुष्परिणाम हम सब के सामने है और हमें उससे सीख लेकर आगे बढ़ना होगा।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाना होगा। यह भारत की‘देववाणी’है इसका अंदाजा इस बात से भी होता है कि हमारा कोई मंत्र एवं श्लोक बिना संस्कृत के पूरा नहीं होता। श्री योगी ने समारोह के बाद सर्किट हाउस में आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर अगले साल जनवरी में यहां आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के मद्देनजर विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कई विकास परियोजनाओं के कार्य की प्रगति की जानकारी ली। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-56 के निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार पर नाराजगी व्यक्त करते हुए काम में तेजी लाने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये।