न्याय पालिका पर पूर्ण आस्था जताते हुए बाबरी मस्जिद मुद्दई इकबाल अंसारी ने गुरूवार को कहा कि वह सच्चे हिन्दुस्तानी है और जान से मारने की मिल रही धमकी उन्हे नहीं डरा सकती। बाबरी विध्वंस की 26वीं वर्षगांठ पर इकबाल अंसारी ने कहा ‘‘ मुझे एक पत्र के जरिये जान से मारने की धमकी दी गयी है जिसकी मौखिक सूचना मैंने श्रीरामजन्मभूमि थाना को दे दी है। इस तरह की धमकियों से मैं डरने वाला नहीं हूँ क्योंकि कानून और अदालत पर पूरा भरोसा है। ’’

सुप्रीम कोर्ट में चल रहे बाबरी मस्जिद, रामजन्मभूमि मुकदमे में पक्षकार इकबाल अंसारी को पत्र भेजने वाले ने न सिर्फ मुकदमा वापस लेने की धमकी दी है बल्कि बाबरी मस्जिद की वकालत कर रहे अधिवक्ता जफर याब जिलानी के नाम का जिक्र भी किया गया है। टूटी-फूटी हिंदी भाषा में लिखे पत्र में अंसारी को धमकी दी गयी है कि मुकदमा वापस नहीं लिया तो जान से मार दिया जायेगा। दिलचस्प बात यह है कि आखिर में पत्र भेजने वाले का नाम लालू यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजद लिखा है।

6 दिसंबर : बाबरी विध्वंस की आज बरसी , BJP का शौर्य दिवस तो मुस्लिम पक्ष का काला दिन

पत्र के बाहरी हिस्से में टूटी-फूटी राइटिंग में रमश्रय राय अधिवक्ता कोर्ट समस्तीपुर, बिहार लिखा है। इकबाल अंसारी ने बताया कि पत्र में दो-तीन पता होने के नाते लिखित तौर पर थाना श्रीरामजन्मभूमि में एफआईआर दर्ज नहीं कराया है लेकिन मौखिक सूचना पुलिस को दे दी है। उन्होंने बताया कि खाकी रंग के लिफाफे में दो पन्नों के इस पत्र में लिखा है कि रामजन्मभूमि रामलला की और हिन्दुओं की है। मुसलमानों ने बेवजह मुकदमा कर जालसाजी, फरेब और धोखाधड़ किया है और साधू-संतों को परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पत्र में यह भी लिखा है कि अयोध्या के मुसलमानों को अगर जिंदा रहना है तो उन्हें अपना दावा छोड़ देना चाहिए। दो पन्ने के इस पत्र में कई आपत्तिजनक बातें लिखी हैं और बाबरी मस्जिद की पैरवी करने वालों के साथ ऐसा करने की धमकी दी गयी है। बाबरी मस्जिदमुद्दई ने बताया कि इससे पूर्व में भी उन्हें पत्र द्वारा जान से मारने की धमकी दी जा रही है लेकिन उन्हें देश के कानून और कोर्ट पर पूरा भरोसा है।

ऐसी धमकियों से डरने वाले हम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम इंसाफ की लड़ई लड़ रहे हैं और जब तक कोर्ट इसका फैसला सुना नहीं देती तब तक हम लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर-मस्जिद का विवाद देश के सुप्रीम कोर्ट में है जो भी कोर्ट फैसला करेगा देश के सभी मुस्लिम समाज उसका स्वागत करेंगे।