भव्य कुंभ के पहले शाही स्नान 15 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर होने से पूर्व प्रयागराज में सुरक्षा-व्यवस्था को पुख्ता कर लिया गया है। स्नान के समयकाल में अमृत और साध्य योग रहेगा। इस काल में किए गए स्नान, दान से अधिक पुण्य मिलेगा। शाही स्नान से पूर्व प्रयागराज में सुरक्षा-व्यवस्था को पुख्ता कर लिया गया है।

इससे पहले आज भी श्रद्धालुओं ने वाराणसी से लेकर प्रयागराज तक आस्था की डुबकी लगाई। शाही स्नान को देखते हुए प्रयागराज में तीन दिन के लिए 12वीं तक के स्कूल-कॉलेजों को बंद किया गया है। स्थानीय अधिकारी के अनुसार, शाही स्नान के कारण 14, 15 और 16 जनवरी को सभी स्कूल बंद रहेंगे, ताकि यातायात प्रभावित ना हो और बच्चों को भी कोई परेशानी ना हो।

इसके अलावा कॉलेजों से अपील की गई है कि वे भी किन्हीं विशिष्ट परिस्थिति को छोड़कर अपना कॉलेज बंद रखें। साथ ही यातायात को लेकर भी कई एडवाइजरी जारी की गई हैं। कुंभ के लिए तैनात स्पेशल पुलिस की तरफ से भी यातायात को लेकर कुछ एडवाइजरी जारी की गई हैं। शहर के अंदर और शहर के बाहर से आने वाले रास्तों में कुछ बदलाव भी किया गया है।

दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुंभ मेला में मकर संक्रांति के पहले स्नान पर्व के साथ डेढ माह से अधिक दिन तक चलने वाले मेले के दौरान 12 से 14 करोड़ श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगायेंगे। मेले के दौरान मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा के साथ 04 मार्च को महाशिवरात्रि पर्व तक कुल छह स्नान पर्व होंगे, जिसमें से 15 जनवरी मकरसंक्रांति, चार फरवरी मौनी अमावस्या और 10 फरवरी बसंत पंचमी पर्व पर शाही स्नान होगा।

मेले में कल्पवास करने और आस्था की डुबकी लगाने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संगम की रेती पर बसाया गया तंबुओं का अस्थाई शहर इन दिनों गहमागहमी से भरपूर है। प्राचीन काल से संगम तट पर जुटने वाले कुंभ मेले की जीवंतता में आज भी कोई कमी नहीं आयी है। मेले में आस्था और श्रद्धा से सराबोर पुरानी परम्पराओं के साथ आधुनिकता के रंगबिरंगे नजारे देखने को मिलते हैं।

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कुंभ मेले में दूरदराज से आकर संगम तट पर कल्पवास करने वाले साधु-संत, सन्यासी, दिव्यांगों और गृहस्थों द्वारा किये जाने वाले भजन-कीर्तन की एक झलक पाने के लिए बडी तादाद में विदेशी सैलानियों का भी जमघट लगा रहता है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से प्रभावित कई विदेशी भी इस दौरान ‘पुण्य लाभ’ के लिए संगम स्नान करते नजर आते हैं।

राष्ट्रीय कुंभ-कुंभ आगाज दो अंतिम प्रयागराज मेले में विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और विविधताओं का संगम भी देखने को मिलता है। देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु आते हैं और पतित पावन संगम में स्नानकर खुद को धन्य मानते हैं। कड़के की ठंड और शीतलहरी पर विश्वास की आस्था भारी पडती है। इलाहाबाद जिला प्रशासन द्वारा कुंभ मेले में आने वाले साधु संतों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक बंदोबस्त किये गये हैं।

सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करने के साथ मेला क्षेत्र में बिजली,पानी, शौचालय और साफ-सफाई के इंतजाम सुनिश्चित किये गये हैं। कुम्भ मेला अधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया कि मेला क्षेत्र में अखाडों और साधु संतों के शिविर लग चुके हैं। आस्था और श्रद्धा का यह महामिलन मंगलवार से शुरू होकर 04 मार्च तक चलेगा। उन्होंने बताया कि वैसे, माघी पूर्णिमा स्नान के बाद मेला धीरे-धीरे ढ़लान की बढ़ना शुरू कर देता है।

हालांकि मेला महाशिवरात्रि स्नान तक रहता है। मेला क्षेत्र के लिए इस बार 3200 हैक्टेअर जमीन उपलब्ध है जबकि वर्ष 2013 के कुंभ में करीब 500 हैक्टेअर क्षेत्रफल पर मेले का आयोजन किया गया था। उन्होंने बताया कि स्नान घाटों पर ‘डीप वाटर’ बैरीकेडिंग कर दी गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुम्भ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संगम तट के नजदीक पहुंचाने के लिए शटल बस और ई रिक्शा चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संगम से पार्किंग स्थल की दूरी पांच किलोमीटर से अधिक नहीं होने का भी निर्देश दिया है।