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प्रियंका गांधी:मुझे गैरकानूनी ढंग से रखा गया, वकीलों को भी नहीं मिलने दिया

लखीमपुर हिंसा के बाद किसानों से मिलने जा रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को 3 अक्टूबर को  सुबह साढ़े चार बजे सीतापुर में हिरासत में ले लिया था। जिसके बाद उन्हें आज रिहा कर दिया गया है। बहार आने के बाद प्रियंका गांधी वाद्रा ने  आरोप लगाया कि उन्हें सीतापुर के पीएसी परिसर में गैरकानूनी ढंग से रखा गया है और हिरासत के 38 घंटे बीत जाने के बावजूद कोई प्राथमिकी नहीं दिखाई गई है तथा उन्हें अपने वकीलों से भी नहीं मिलने दिया जा रहा है।

प्रियंका गांधी ने एक बयान में कहा कि उन्हें अब तक किसी मजिस्ट्रेट या न्यायिक अधिकारी के समक्ष पेश नहीं किया गया और न ही उन्हें अपने वकील से मिलने दिया गया जबकि उनके वकील सुबह से ही परिसर के गेट पर खड़े हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल में इसका ब्यौरा नहीं दे रही हूं कि गिरफ्तारी के समय किस तरह मेरे और मेरे साथियों पर पूरी तरह से गैरकानूनी बल प्रयोग किया गया है क्योंकि यह बयान सिर्फ यह स्पष्ट करने के लिए है कि मुझे पीएसी परिसर में गैरकानूनी ढंग से रखा गया है।’’

कांग्रेस महासचिव के मुताबिक, ‘‘मुझे कोई आदेश या नोटिस नहीं दिया गया है। न ही उन्होंने मुझे प्राथमिकी दिखाई है। मुझे किसी मजिस्ट्रेट या न्यायिक अधिकारी के समक्ष पेश नहीं किया गया है। ’’

प्रियंका गांधी को लखीमपुर खीरी जाते समय रास्ते से हिरासत में लिया गया था और वह सोमवार सुबह से ही पुलिस की अभिरक्षा में हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक कागज का हिस्सा देखा जिसमें प्रशासन ने 11 लोगों को नामित किया है और इनमें से आठ वो लोग हैं जो उनकी ‘गिरफ्तारी’ के समय उपस्थित ही नहीं थे। प्रियंका ने कहा कि असल में दो ऐसे व्यक्तियों को नामित किया गया है जो ‘चार अक्टूबर को दोपहर के समय लखनऊ से मेरे कपड़े लाए थे।’’कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें डीएसपी पीयूष कुमार सिंह (सीओ सिटी-सीतापुर) द्वारा चार अक्टूबर की शाम साढ़े चार बजे मौखिक रूप से सूचित किया गया कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘जब मुझे गिरफ्तार किया गया तो मैं सीतापुर जिले में ही थी और लखीमपुर खीरी से करीब 20 किलोमीटर दूर थी जहां धारा 144 लगाई गई थी। बहरहाल, मेरी जानकारी के हिसाब से सीतापुर में धारा 144 नहीं लगी हुई थी।’’उनके मुताबिक, वह जिस वाहन में थी उसमें उनके साथ चार लोग थे। दो स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता और राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा तथा संदीप सिंह (निजी सचिव) थे।

प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘मुझे पीएसी परिसर दो महिला एवं दो पुरुष सिपाहियों के साथ ले जाया गया था। इसके बाद मुझे पांच अक्टूबर की शाम 6.30 बजे तक यह नहीं सूचित किया गया कि किन हालात या कारणों के चलते या फिर किन धाराओं में मुझे यहां रखा गया है।