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UP विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सियासी बिसात बिछाने में लगे सभी दल, जनता का भरोसा जीतने की कोशिश शुरू

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। सभी पार्टियां जनता के भरोसे पर खरा उतरने के लिए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण ठीक करने में जुटी हैं। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बूथ विजय अभियान और पन्ना प्रमुख सम्मेंलनों के जारिए तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। विपक्षी दल सपा, बसपा, कांग्रेस भी यात्राओं और सम्मेलन के माध्यम से ताकत झोंक दी है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2014 की जीत के बाद से ही राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। फिर विधानसभा 2017 के चुनाव में पूर्ण बहुमत पाकर सपा सत्ता से बेदखल कर दिया। इसके बाद 2019 के चुनाव में पार्टी ने अपना परचम लहराया। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जीत का सिलसिला जारी रहा। भाजपा लगातार जीत से उत्साहित है। 2022 में भी पार्टी 300 के पार लक्ष्य बात रही है। सत्ताधारी दल के चुनावी अभियान महीनों से चल रहे हैं। अभी बूथ विजय अभियान शुरू किया है और 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन से सेवा समर्पण अभियान भी शुरू होने जा रहा है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीष त्यागी का कहना है कि भाजपा हमेशा जनता के बीच में रहती है। जनता के लिए अच्छे काम करती है। इसी कारण हमें जनता का प्यार मिलता है। आने वाले समय में भी ऐसा होगा। जबकि विपक्षी दल चुनाव के समय जागते हैं। इसलिए हर बार की तरह नकारे जाएंगे। पार्टी एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

उधर, भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्षी दल सपा, बसपा, और कांग्रेस से पूरी तैयारी कर रखी है। सपा ने बड़े दलों के साथ गठबंधन से इंकार किया है। उसने छोटे दलों के साथ अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि दलों ने अभी गठबंधन के रास्ते खोल रखे हैं। सपा रालोद के साथ मिलकर किसान आंदोलन का फायदा उठाने की रणनीति बना रही है। इसके अलावा सपा भी प्रबुद्ध सम्मेलन का दूसरा चरण शुरू करने जा रही है। बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करने के लिए भी कदम बढ़ाया है। इसके अलावा दिल्ली की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी की सपा से नजदीक किसी से छुपी नहीं है। हालांकि पार्टी ने अकेले ही चुनाव मैदान में उतरने का का निर्णय लिया हैं।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर अपनी चुनावी तैयारियों के लिए कई छोटे दलों के साथ गठबंधन करके मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी ने भी 2019 के चुनाव में सपा के साथ गठबंधन किया था। लेकिन सफलता ज्यादा न मिलने से उसने भी अपना रास्ता अलग बना लिया हैं। इसके बाद वह लगातार तैयारियां कर रही है। बसपा ने प्रबुद्ध जन सम्मेलन प्रदेशभर में कर चुकी है और अब नौ अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती पर हर जिले से समर्थक और कार्यकतार्ओं को बुलाकर ताकत का अहसास कराना चाहती है।

उधर कांग्रेस छोटे-छोटे कार्यक्रम तो कई कर चुकी है, लेकिन अब पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा चुनावी कमान अपने हाथों में ले ली है। कांग्रेस प्रदेश भर में प्रतिज्ञा यात्रा निकालने जा रही है। इसमें ग्रामीण स्तर तक सक्रियता के कार्यक्रम भी होंगे। इधर, रालोद ने भी यात्रा निकालने का ऐलान किया है। इस तरह लगभग सभी दल चुनाव के लिए मैदान में उतर चुके हैं, जिससे दिनों-दिन सियासी ताप बढ़ता रहेगा।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पीएन द्विवेदी ने कहा कि यूपी के चुनाव में दुनिया की निगाह होती हैं। सियासी रूप से बड़ा और महत्वपूर्ण राज्य होंने की वजह से यहां पर चुनाव के साल भर पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती है। सभी दल अपनी-पूरी दमखम दिखाने के लिए मैदान में जुटे हैं।