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भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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वैश्विक महामारी से निपटने में महत्त्वपूर्ण हो सकती है ‘आयुष्मान भारत’ योजना: डब्ल्यूएचओ

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर भारत में थमने का नाम नहीं ले रहा है और संक्रमितों और मृतकों की संख्या में दिन-प्रतिदन बढ़ोतरी हो रही है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आयुष्मान भारत योजना की तारीफ करते हुये कहा है कि इसके क्रियान्वयन में तेजी लाकर देश कोविड-19 से बेहतर तरीके से निपट सकता है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. तेद्रोस गेब्रियेसस ने कोविड-19 पर कहा, ‘‘निस्संदेह कोविड बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और कई राष्ट्रों के समक्ष गंभीर चुनौती है, लेकिन हमें इसमें अवसर भी तलाशने होंगे। भारत के लिए यह आयुष्मान भारत को गति देने का अवसर साबित हो सकता है, खासकर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर फोकस करते हुये।’’ मोदी सरकार की महत्त्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत के तहत सरकार ने 10 करोड़ गरीब परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये की नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। साथ ही इसमें जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़ बुनियादी ढाँचों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

तेद्रोस ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं और जन भागीदारी के जरिये हम महामारी की लहर का रुख मोड़ सकते हैं। भारत ने जो योजना शुरू की है उसका भरपूर इस्तेमाल करने और उसके क्रियान्वयन को गति देने से उसे लाभ हो सकता है। सरकार आयुष्मान भारत को तेजी से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ आयुष्मान भारत की तारीफ करता रहा है और यह इस योजना को कसौटी पर कसने तथा गति देने के लिए अच्छा अवसर हो सकता है। इस महामारी से लड़ने में इसका पूरा इस्तेमाल किया जाना चाहिये।

डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ। सौम्या स्वामिनाथन ने कहा कि भारत में दो लाख से अधिक मामले आये हैं। वैसे देखने में यह संख्या बड़ लगती है, लेकिन 130 करोड़ की आबादी वाले देश के हिसाब से यह अब भी बहुत ज्यादा नहीं है। संक्रमण के बढ़ने की दर और मामलों के दुगुना होने की रफ्तार पर नजर रखना महत्त्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करना होगा कि स्थिति बिगड़े नहीं।

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उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं से भरा विशाल देश है। एक तरफ शहरों में बेहद घनी आबादी है तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या घनत्व काफी कम है। हर राज्य में स्वास्थ्य प्रणाली अलग-अलग है। ये सभी कारणों से कोविड-19 को नियंत्रित करना काफी चुनौतीपूर्ण है। लॉकडाउन और प्रतिबंधों में ढील के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्याप्त सावधानी बरती जा रही है और लोग इसकी जरूरत समझ रहे हैं। यदि लोगों के तौर-तरीकों में बड़ बदलाव लाना है तो उन्हें यह समझाना आवश्यक है कि क्यों उन्हें ऐसा करना चाहिये।

डॉ. स्वामिनाथन ने कहा कि देश के कई शहरी क्षेत्रों में सामाजिक दूरी का पालन संभव नहीं है। इसलिए यह महत्त्वपूर्ण है कि लोग चेहरे को ढँककर बाहर निकलें। जहां कार्यालयों में, सार्वजनिक परिवहन के दौरान और शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो सकता वहाँ भी चेहरा ढँकना जरूरी है। हर संस्थान, संगठन और उद्योग को इस पर विचार करना चाहिये कि काम शुरू करने से पहले उन्हें किस प्रकार के एहतियाती उपाय करने की जरूरत है। हो सकता है कि कोरोना से पहले की स्थिति कभी वापस न आये।