BREAKING NEWS

एनसीबी-मुंबई के शीर्ष अधिकारी समीर वानखेड़े दिल्ली पहुंचे, कहा - कुछ काम से यहां आया हूँ◾18वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे पीएम मोदी, जानिए किन मुद्दों पर होगी चर्चा ◾ केजरीवाल अयोध्या में सरयू आरती में हुए शामिल, मंगलवार को रामलला का करेंगे दर्शन◾देश के किसानों को नहीं मिल रही MSP! कांग्रेस ने केंद्र को घेरते हुए कहा- सरकारी एजेंसी ‘एगमार्कनेट’ ने किया स्वीकार ◾IPL New Teams: लखनऊ और अहमदाबाद के रूप में आईपीएल को मिलीं दो नई टीमें, अगले साल से खेलेंगी◾जम्मू-कश्मीर: पुलवामा में CRPF जवानों के साथ रात गुजारेंगे शाह, स्थानीय लोगों को दिया अपना मोबाइल नंबर ◾ यूपी चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा भाजपा का विरोध करेगा: राकेश टिकैत◾पश्चिम बंगाल: 20 महीने के बाद खुलेंगे शैक्षणिक संस्थान, CM ममता ने जारी किया आदेश ◾कश्मीर घाटी में हमलों को जल्द रोकने के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था◾नरेंद्र गिरि की जगह संभालेंगे महंत रवींद्र पुरी, निरंजनी अखाड़ा ने बनाया अध्यक्ष◾मलिक के आरोपों पर वानखेड़े और पत्नी क्रांति का पलटवार, खुद को बताया मुस्लिम मां और हिंदू पिता का बेटा◾क्रूज ड्रग्स केस: राउत बोले- महाराष्ट्र को जानबूझ कर किया जा रहा है बदनाम, अधिकारी होंगे बेनकाब◾कांग्रेस ने फेसबुक को बताया 'फेकबुक', कहा- यह एक शातिर शैतानी उपकरण जिसका BJP से है गठजोड़◾केजरीवाल सरकार के डेंगू रोकथाम अभियान के बावजूद नए मामलों में वृद्धि जारी, एक हफ्ते में 283 मरीज मिले ◾पाकिस्तान के खिलाफ हार के बाद शमी हुए ट्रोल, यूजर्स पर भड़के सहवाग◾कोविशील्ड और कोवैक्सिन के मास वैक्स के खिलाफ SC में याचिका खारिज, कहा- टीकाकरण पर न करें संदेह ◾अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर साधा निशाना, कहा- PAK के बजाय घाटी के लोगों से बात करेगी सरकार ◾क्रूज ड्रग केस: क्या आर्यन खान को छोड़ने के लिए मांगे गए 25 करोड़, कमिश्नर ऑफिस पहुंचा 'स्वतंत्र गवाह'◾नवाब मलिक ने शेयर किया वानखेड़े का 'बर्थ सर्टिफिकेट', कहा- यहां से शुरू हुआ फर्जीवाड़ा ◾कोई भी नागरिक स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में दम नहीं तोड़ेगा, इंतजार हुआ खत्म : सीएम योगी◾

अस्पताल में भर्ती हुए कोरोना के आधे मरीजों में एक साल बाद भी लक्षण मौजूद : अध्ययन

कोरोना महामारी के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए लोगों में से करीब आधे में कम से कम एक लक्षण संक्रमण के एक साल बाद भी बना रहता है। एक अध्ययन में यह कहा गया है। चीन के वुहान में 1,276 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि तीन लोगों में से एक को 12 महीने बाद भी सांस लेने में दिक्कतें बनी हुई थी जबकि गंभीर रूप से बीमार कुछ मरीजों में फेफड़े से जुड़ी समस्याएं भी मिलीं।

कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुए लोगों की तुलना में संक्रमित लोगों को कम तंदुरुस्त पाया गया। चीन-जापान फ्रेंडशिप हॉस्पिटल के प्रोफेसर बिन काओ ने कहा, ‘‘हमारा अध्ययन अस्पतालों में भर्ती हुए संक्रमित लोगों के, 12 महीने बाद बीमार होने के संबंध में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है।

ज्यादातर मरीज पूरी तरह ठीक हो गए लेकिन गंभीर रूप से बीमार हुए कुछ मरीजों में स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतें बरकरार थीं।’’ अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि कुछ मरीजों के ठीक होने में एक वर्ष से अधिक समय लगेगा, और महामारी के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति की योजना बनाते समय इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अध्ययन के दौरान उन मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया जिन्हें सात जनवरी से 29 मई 2020 के दौरान अस्पतालों से छुट्टी दी गयी थी। इन मरीजों ने अस्पताल से छुट्टी के करीब छह और 12 महीने बाद स्वास्थ्य संबंधी विस्तृत जांच करायी। साथ ही इन लोगों से कई तरह के सवाल भी पूछे गए तथा अलग-अलग तरह की जांच की गयी।

अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत उम्र 57 साल थी। शोधकर्ताओं ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के आरंभिक दिनों में मरीजों में जो जो लक्षण थे वो धीरे-धीरे खत्म हो गए। हालांकि कुछ मरीजों में कम से कम एक लक्षण मौजूद था। अध्ययन से सामने आया कि थकावट या मांसपेशी की कमजोरी, सबसे सामान्य लक्षण था।

संक्रमण के छह महीने बाद भी लोगों को ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा वहीं एक साल बाद पांच में से एक मरीज में इस तरह का लक्षण मौजूद था। करीब एक तिहाई मरीजों ने 12 महीने बाद सांस लेने में दिक्कतों की शिकायत की। ये ऐसे मरीजे थे जो गंभीर रूप से बीमार हुए थे और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी थी।

शोधकर्ताओं ने कहा कि छह महीने की तुलना में एक साल बाद कुछ मरीजों में बेचैनी और घबराहट की समस्या पहले से ज्यादा बढ़ गयी। शोध लेखकों में शामिल, चीन-जापान फ्रेंडशिप हॉस्पिटल के शियाओइंग गू ने कहा, ‘‘हम यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि संक्रमण के छह महीने की तुलना में एक साल बाद कुछ दिक्कतें क्यों बढ़ गयीं।

संक्रमण के कारण जैविक प्रक्रिया या शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण ऐसा हो सकता है। सामाजिक संपर्क घटना, अकेलापन बढ़ना, पूरी तरह ठीक नहीं होना भी इसके लिए कारण हो सकता है।’’