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बांग्लादेश में रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने ‘जल्दबाजी में’ देश वापसी की योजना का किया विरोध

बांग्लादेश में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित सैंकड़ों रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों ने गुरूवार को ‘जल्दबाजी में’ म्यांमार वापसी की योजना के खिलाफ प्रदर्शन किया, वहीं ढाका ने कहा कि वह योजना को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है जिसका संयुक्त् राष्ट्र और सहायता एजेंसियों ने विरोध किया है।

पिछले साल अगस्त से सात लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी म्यांमार का रखाइन प्रांत छोड़ चुके हैं। इससे पहले उनके खिलाफ कू्रतापूर्ण सैन्य कार्रवाई की गयी थी। संयुक्त राष्ट्र ने इसे जातीय सफाये का उदाहरण बताया था, वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे नरसंहार की संज्ञा दी। इसे लेकर दुनियाभर में नाराजगी देखने को मिली।

अधिकारियों ने कहा कि कॉक्स बाजार के उनचिपरांग शिविर में गुरूवार सुबह से चार ट्रक और तीन बसें खड़ी हैं जो उन शरणार्थियों को ले जाने को तैयार हैं लेकिन एक भी उन पर सवार होने को तैयार नहीं है।

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कई हजार रोहिंग्या लोगों ने म्यांमार वापस जाने से इनकार करते हुए प्रदर्शन किया। बांग्लादेश ने 2000 रोहिंग्या मुसलमानों के पहले जत्थे को म्यामां वापस भेजने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह सब म्यामां के साथ अक्टूबर में तय हुई योजना की तर्ज पर किया जा रहा है।

मौके पर मौजूद राहत आयुक्त कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘बसें तैयार हैं और हमने वापस जाने वालों के लिए तीन दिन का राशन भी तैयार कर रखा है, लेकिन पहले बैच में कोई बस पर सवार नहीं हुआ है।’’

एक रोहिंग्या प्रदर्शनकारी ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ‘‘हम अपनी सुरक्षा और सम्मान चाहते हैं। हमें उन पर (म्यांमार के अधिकारियों पर) भरोसा नहीं है।’’

बांग्लादेश के शरणार्थी आयुक्त मोहम्मद अबुल कलाम ने पहले कहा था कि जिन 50 परिवारों से बातचीत की गयी है, उनमें से कोई भी मौजूदा परिस्थितियों में वापस जाने को तैयार नहीं है। हम उनकी इच्छा के विरुद्ध वापस जाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

कलाम ने कहा, ‘‘हम इंतजार कर रहे हैं, अगर शाम चार बजे तक कोई वापसी के लिए तैयार हो गया तो हम वापसी शुरू करेंगे।’’