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POK के राष्ट्रपति ने बाइडन से कश्मीर मसले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के राष्ट्रपति सरदार मसूद खान ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन से दशकों पुराने कश्मीर संघर्ष को सुलझाने में हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है। एक बयान में खान ने नए अमेरिकी प्रशासन से भारत अधिकृत जम्मू और कश्मीर (आईओजेके) के लोगों की दुर्दशा को समाप्त करने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने अमेरिका से इस बात की भी मांग की कि वह जनसांख्यिकी बदलने और अवैध रूप से भारतीय हिंदू आबादी बढ़ाने से रोकने के लिए भारत को मजबूर करे। उनके हवाले से बयान में कहा गया है, कम से कम अमेरिका, भारत को अधिकृत जम्मू और कश्मीर में भारतीय हिंदू आबादी को बढ़ाने और अधिकृत कश्मीर में निहत्थे कश्मीरियों को मारने से रोकने के लिए कह सकता है।

बयान में यह भी कहा गया है, वॉशिंगटन को कश्मीर पर अपने विचारों में संशोधन करना चाहिए। यह सोचता है कि 9,00,000 भारतीय सैन्य और अर्ध-सैनिक टुकड़ियां कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ रही हैं। लेकिन, यह भारत द्वारा दुनिया को धोखा देने के लिए बनाया गया एक गलत आधार है।

खान ने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप आईओजेके में नागरिक स्वतंत्रता और मूलभूत स्वतंत्रता को रोकने एवं उन्हें बहाल करने पर केंद्रित होना चाहिए। पिछली शताब्दी के दौरान आत्मनिर्णय के अधिकार का एक प्रवर्तक होने के नाते अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों द्वारा परिकल्पित और जनादेश के रूप में उनकी राजनीतिक पहचान के लिए कश्मीरियों की अपनी पसंद की स्वतंत्रता के रास्ते में नहीं खड़ा होना चाहिए। 

उन्होंने कश्मीर विवाद पर निराशाजनक प्रदर्शन के लिए संयुक्त राष्ट्र की आलोचना भी की। बयान में कहा गया है, कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका निराशाजनक है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव इसे जानते हैं। लेकिन उनके हाथ बंधे हुए हैं। वह इस मुद्दे के बारे में बहुत कुछ नहीं कर सकते क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस दिशा में बिल्कुल भी आगे नहीं बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान और पीओके के राजनीतिक दलों को इस संघर्ष पर विश्व का ध्यान आकर्षित करने के लिए सबसे पहले कश्मीर पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उनके हवाले से बयान में कहा गया है, इससे पहले कि दुनिया कश्मीर पर अपना ध्यान केंद्रित करे, पाकिस्तान और आजाद कश्मीर के लोगों और राजनीतिक दलों को ऐसा करना होगा। 

दुनिया को सबसे पहले इस बात का साक्षी बनाने की जरूरत है कि इस मुद्दे को लेकर हम कश्मीरी और पाकिस्तानी कितने गंभीर हैं। उन्होंने कहा, आईओजेके के निहत्थे लोग हर दिन आजादी के लिए खून दे रहे हैं। भारतीय सेना के आतंक के सामने उन्होंने घुटने नहीं टेके हैं और स्वतंत्र नागरिकों के रूप में हमें उनसे बेहतर करना चाहिए।