पाकिस्तान को शुक्रवार को एक और बड़ा झटका लगा है। वह विश्व के शीर्ष आतंकवाद रोधी निगरानी समूह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट से बाहर होने में विफल रहा है। इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार पेरिस स्थित एफएटीएफ की आतंकवाद के खिलाफ 27 सूत्रीय एजेंडे को पूरा करने में विफल रही है, इसलिए पाकिस्तान को फिलहाल ग्रे लिस्ट में ही बनाए रखने का फैसला लिया गया है।
एफएटीएफ के निर्णय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान की ग्रे सूची से बाहर का एकमात्र तरीका 27-सूत्रीय कार्य योजना का अनुपालन है, मगर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि भारत की काली सूची में पाकिस्तान को फिसलते हुए देखने की इच्छा थी, मगर नई दिल्ली की योजना विफल हो गई है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को एफएटीएफ की काली सूची में धकेलने की भारत की योजना विफल होगी, क्योंकि देश ने वैश्विक धन शोधन और आतंकी वित्तपोषण निगरानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए कदम उठाए हैं।”
कुरैशी ने कहा, “मैं इसे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भारत पाकिस्तान को काली सूची में धकेलने के लिए अपने डिजाइन में विफल हो जाएगा। दुनिया ने आज स्वीकार किया है कि सरकार और संसद ने एफएटीएफ की कार्ययोजना के संबंध में ठोस कदम उठाए हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने एक्शन प्लान में उल्लिखित 27 बिंदुओं में से कम से कम 21 बिंदुओं का अनुपालन किया है, उम्मीद है कि दुनिया देश द्वारा उठाए गए कदमों को स्वीकार करेगी।


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