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इमरान के लिए परेशानी का सबब बना तहरीक-ए-तालिबान, मंडरा रहा आतंकी हमलों में वृद्धि का खतरा

पाकिस्तान खूंखार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से बढ़ते आतंकी हमले की एक नई लहर के लिए तैयार है। अफगान-तालिबान के पाकिस्तानी धड़े टीटीपी की ओर से किए जाने वाले हमलों से पाकिस्तान पहले से ही काफी परेशान है, जिसने हाल ही में इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार के साथ एक महीने के संघर्ष विराम के लिए सहमति व्यक्त की थी। हालांकि अब आतंकवादी संगठन ने समझौते को कोई विस्तार देने से इनकार कर दिया है।

टीटीपी ने एक बयान में पाकिस्तान सरकार पर युद्धविराम समझौते में परस्पर सहमति वाले फैसलों का सम्मान करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। बयान में कहा गया है, पाकिस्तान सरकार न केवल दोनों पक्षों के बीच हुए फैसलों को लागू करने में विफल रही है, बल्कि इसके विपरीत, सुरक्षा बलों ने डेरा इस्माइल खान, लक्की मारवात, स्वात, बाजौर, स्वाबी और उत्तरी वजीरिस्तान में छापेमारी की और हिरासत में लिए गए आतंकवादियों को मार गिराया।

उन्होंने कहा, इन परिस्थितियों में संघर्ष विराम को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। इससे पहले, पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच बातचीत चल रही थी और दोनों पक्ष एक महीने तक चलने वाले युद्धविराम समझौते पर सहमत हो गए थे। दोनों पक्ष छह सूत्री समझौते पर सहमत हुए थे। दोनों पक्षों ने स्वीकार किया था कि तालिबान के नेतृत्व वाला इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (आईईए) एक मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा और दोनों पक्ष पांच-सदस्यीय समिति बनाएंगे, जो कार्रवाई के अगले पाठ्यक्रम और दोनों पक्षों की मांगों के लिए बातचीत का रास्ता तय करेगी।

1 नवंबर से 30 नवंबर तक एक महीने तक चलने वाले युद्धविराम को लागू करने के लिए एक समझौता किया गया था। पाकिस्तान सरकार ने सहमति व्यक्त की थी कि वह कम से कम 102 तात्कालिक मुजाहिदीन को रिहा करेगी और उन्हें आईईए की देखरेख में टीटीपी को सौंप देगी। यह उम्मीद थी कि टीटीपी के साथ सफल वार्ता के बाद महीने भर के संघर्ष विराम को और आगे बढ़ाया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

एक ऑडियो संदेश में, तालिबान कमांडर मुफ्ती नूर वली महसूद ने युद्धविराम की समाप्ति की घोषणा की और सभी टीटीपी सेनानियों को हमले फिर से शुरू करने के लिए कहा है। ऑडियो संदेश में नूर वली महसूद को कहते हुए सुना गया है, चूंकि टीटीपी को मध्यस्थों या सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है, इसलिए आधी रात को हमारे लड़ाके जहां कहीं भी हैं, हमलों को फिर से शुरू करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

युद्धविराम का अंत पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि उसने शांति समझौते को सुरक्षित करने के प्रयासों को दरकिनार कर दिया है और टीटीपी आतंकवादियों और सरकार के बीच सकारात्मक जुड़ाव के दरवाजे बंद कर दिए हैं। 

जबकि युद्धविराम का एक स्पष्ट प्रभाव है, क्योंकि पाकिस्तान के अंदर टीटीपी के नेतृत्व वाले आतंकवादी हमले, जिसमें हाल के दिनों में एक बड़ी वृद्धि देखी गई थी, में अभी काफी गिरावट आई है। दोनों तरफ से यह भी साफ कर दिया गया था कि कुछ लाल रेखाएं (रेड लाइन्स) होंगी, जिन्हें पार नहीं किया जाएगा। इसमें समूह बनाना, फिर से समूह बनाना, सुरक्षित पनाहगाह, पाकिस्तानी पक्ष से आतंकवादियों की मूवमेंट शामिल है।

दूसरी ओर, टीटीपी ने शरिया इस्लामी कानून को लागू करने और आदिवासी क्षेत्रों को संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों (फाटा या एफएटीए) के रूप में लागू करने के लिए अपनी शर्त रखी थी, जिसे 2017 में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मिला दिया गया था। लेकिन युद्धविराम की वर्तमान समाप्ति के साथ, पाकिस्तानी सुरक्षा बल और स्थानीय लोग टीटीपी आतंकवादियों द्वारा लक्षित हमलों में वृद्धि के लिए तैयार हैं, जो कि एक ऐसी समस्या बनी हुई है, जिससे देश दशकों से लड़ रहा है।