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UN का बयान -संघर्षों के कारण कोरोना से निपटना हो रहा है मुश्किल, पूरी दुनिया गिरफ्त में, बदतर हो गए हालात

संयुक्त राष्ट्र द्वारा कोविड-19 से निपटने के लिए संघर्ष-विराम का पिछले वर्ष किए गए आह्वान के बावजूद सीरिया, यमन और कांगो में संघर्ष कभी रूका ही नहीं बल्कि कई जगह नए सिरे से संघर्ष शुरू हो गया जिसके कारण कई देशों में संक्रमण फैलने से रोकने और संक्रमितों की देखभाल करने में और परेशानी उत्पन्न हो रही है।

संयुक्त राष्ट्रीय मानवीय मामलों के प्रमुख मार्क लोकॉक ने संघर्ष में फंसे लोगों पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद द्वारा बुलाई ऑनलाइन बैठक में संघर्ष, कोविड-19 और स्वास्थ्य देखभाल के बीच संबंध पर जोर दिया। मार्च 2020 में जब महामारी पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले रही थी तब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सशस्त्र संघर्षों पर विराम लगाने और मिलकर कोविड-19 से निपटने के लिए वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया था।

लोकॉक ने कहा कि कई स्थानों से इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी लेकिन कई जगह घातक संघर्ष जारी रहे बल्कि इथियोपिया, मोज़ाम्बिक, आर्मेनिया और अज़रबैजान में तो हालात और बदतर हो गए। उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ ही, असुरक्षा, प्रतिबंध, आतंकवाद विरोधी उपायों और प्रशासनिक बाधाओं ने मानवीय कार्यों में बाधा डाली।’’ उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी के कारण विमान सेवाएं निलंबित होने, सीमाएं बंद होने, पृथक रहने के नियमों और लॉकडाउन के कारण सहायता मुहैया कराना और मुश्किल हो गया।

लोकॉक ने कहा कि वैश्विक महामारी के दौरान संघर्ष में फंसे लोगों पर ‘‘अत्याचार की कई खबरें’’ भी मिली। ‘रेड क्रॉस’ की अंतरराष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष पीटर मौरर ने अपनी हालिया रिपोर्ट ‘‘युद्ध और बीमारी के दोहरे बोझ का सामना करने वाले समुदायों पर कोविड-19 के प्रभाव’’ का हवाला दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करने की बजाय उस पर हमले किए जा रहे हैं।’’

मौरर और लोकॉक दोनों ने सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे संघर्ष के दौरान लड़ाकों का बर्ताव बदलने पर ध्यान दें। मौरर ने कहा, ‘‘ हमें राजनीतिक एकजुटता, बुनियादी ढांचे और सेवाओं में निवेश करने की जरूरत है। हमें नागरिकों के लिए बेहतर सुरक्षा और मानवीय कार्रवाई के लिए अधिक ठोस और व्यापक समर्थन की आवश्यकता है।’’

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