आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के मार्ग में चीन द्वारा रोड़ा अटकाने को लेकर अमेरिका के एक सांसद ने निराशा जाहिर करते हुए कहा कि चीन के पास अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का ‘बेहतर अवसर’ था।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के बाद फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी’’ के तहत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था। पुलवामा हमले में 40 सैनिक शहीद हो गए थे और भारत तथा पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।

जैश-ए-मोहम्मद पुलवामा के अलावा भारत के विभिन्न हिस्सों में दो दशक में हुए कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है जिनमें 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हुआ हमला भी शामिल है। इस हमले में नौ सुरक्षा कर्मी और अधिकारी मारे गए थे। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष, सांसद इलियट इंगेल ने गुरुवार को कहा, ‘‘ मैं निराश हूं कि चीन ने फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के मार्ग में रोड़ा अटकाने का फैसला किया।”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की कोशिश को 10 साल के भीतर चौथी बार चीन द्वारा बाधित किए जाने के एक दिन बाद इंगेल ने कहा, ‘‘ चीन और पाकिस्तान के पास अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए बेहतर अवसर था।’’

चीन के इस कदम पर भारत ने भी ‘निराशा’ जाहिर की थी। भारतीय मूल के अमेरिकी अटॉर्नी रवि बत्रा ने कहा कि अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में विफल रहना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शांति और सुरक्षा बढ़ाने के मुख्य मिशन को झटका लगने जैसा है।