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भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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वैश्विक स्तर पर भूखों और जरूरतमंदों को खाना खिलाने के लिए वर्ल्ड फूड प्रोग्राम को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

वर्ष 2020 के शांति नोबेल पुरस्कार से विश्व खाद्य कार्यक्रम को सम्मानित किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर भूख से लड़ने और खाद्य सुरक्षा के प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम को शुक्रवार को यह सम्मान देने की घोषणा की गई। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा ओस्लो में नोबेल समिति के अध्यक्ष बेरिट रेइस एंडरसन ने की।

नोबेल समिति ने कहा कि कोरोना वायरस की महामारी के चलते दुनियाभर में भूखे लोगों की संख्या में लाखों का इजाफा हुआ है। समिति ने सरकारों से आह्वान किया कि वे विश्व खाद्य कार्यक्रम और अन्य सहायता संगठनों को वित्तीय मदद सुनिश्चित करे ताकि वे उन्हें भोजन मुहैया करा सकें। बता दें कि नॉर्वे की नोबेल समिति अपने पसंदीदा उम्मीदवार को लेकर पूरी गोपनीयता बरतती है। इसके बावजूद विजेता की घोषणा से पहले अटकलें लगती रहती हैं।

इस बार, अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस साल का शांति पुरस्कार जलवायु कार्यकर्ता एवं स्वीडन की नागरिक ग्रेटा थनबर्ग, नर्व एजेंट हमले से उबर रहे रूस के नेता अलेक्सेई नवलनी और कोरोना वायरस संकट से निपटने में भूमिका के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन में से किसी को दिया जा सकता है। नवलनी ने अपने ऊपर हमले के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आरोप लगाया है।

ऐसा लगता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भी मानना है कि उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना चाहिए। इस पुरस्कार के लिए 318 उम्मीदवार हैं, जिनमें से 211 व्यक्ति और 107 संगठन शामिल हैं। नामांकन के लिए अंतिम समय सीमा एक फरवरी थी। इसका अर्थ हुआ कि मार्च में वैश्विक महामारी घोषित किए गए कोविड-19 से लड़ रहे योद्धाओं में से किसी को पुरस्कार मिलने की संभावना नहीं है।

नोबेल पुरस्कार के तहत स्वर्ण पदक, एक करोड़ स्वीडिश क्रोना (तकरीबन 8.27 करोड़ रूपये) की राशि दी जाती है। स्वीडिश क्रोना स्वीडन की मुद्रा है। यह पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर दिया जाता है। इससे पहले, रसायन विज्ञान और भौतिकी सहित कई क्षेत्रों में इस साल के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की जा चुकी है। शांति एवं अर्थशास्त्र के क्षेत्र में इस पुरस्कार की घोषणा अभी बाकी है।

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