अमेरिका हुआ पेरिस जलवायु समझौते से अलग, भारत-चीन पर सख्ती नहीं


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वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को अलग करने की घोषणा कर दी है। चीन और भारत जैसे देशों को पेरिस समझौते से सबसे ज्यादा फायदा होने की दलील देते हुए ट्रंप ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर समझौता अमेरिका के लिए अनुचित है क्योंकि इससे उद्योगों और रोजगार पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने के लिए अरबों डॉलर मिलेंगे और चीन के साथ वह आने वाले कुछ वर्षों में कोयले से संचालित बिजली संयंत्रों को दोगुना कर लेगा और अमेरिका पर वित्तीय बढ़त हासिल कर लेगा।

व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से बहु प्रत्याशित फैसले की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें पिट्सबर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित किया गया है ना कि पेरिस का। उन्होंने कहा कि पेरिस समझौता अमेरिका पर कठोर वित्तीय एवं आर्थिक बोझ है। अमेरिका और उसके नागरिकों की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है इसलिए अमेरिका पेरिस समझौता से बाहर निकलन जाएगा। हम इससे बाहर हो रहे हैं लेकिन फिर से बातचीत शुरू करेंगे और हम देखेंगे कि क्या हम एक ऐसा समझौता कर सकते हैं जो उचित हो।

उन्होंने कहा कि नेशनल इकोनॉमिक रिसर्च एसोसिएट्स के मुताबिक, पेरिस समझौते की शर्तों और कठोर ऊर्जा प्रतिबंधों का पालन करने से अमेरिका में वर्ष 2025 तक 27 लाख नौकरियों में कमी आ सकती है। ट्रंप ने कहा कि दूसरी ओर भारत और चीन को जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते से सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के प्रमुख प्रदूषक देशों पर सार्थक अनुबंध नहीं लगाए गए। उदाहरण के लिए इस समझौते के तहत चीन 13 साल की बड़ी अवधि तक इन उत्सर्जनों को बढ़ाने में सक्षम हो जाएगा। उन्होंने कहा, ”वे 13 वर्षों तक जो चाहते हैं वो कर सकते हैं लेकिन हम नहीं।” ट्रंप ने कहा, ”भारत विकसित देशों सेे विदेशी सहायता में अरबों डॉलर लेकर अपनी भागीदारी करता है। और भी कई अन्य उदाहरण हैं। लेकिन पेरिस समझौते की आधार बात है कि यह शीर्ष स्तर पर अमेरिका के लिए अनुचित है।”

उन्होंने कहा कि चीन को सैकड़ों अतिरिक्त कोयला संयंत्र बनाने की अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने कहा, ”इस समझौते के अनुसार हम संयंत्र नहीं बना सकते लेकिन वे बना सकते हैं। वर्ष 2020 तक भारत का कोयला उत्पादन दोगुना हो जाएगा। इसके बारे में सोचें। भारत अपना कोयला उत्पादन दोगुना कर सकता है। यहां तक कि यूरोप कोयला संयंत्र का निर्माण जारी रख सकता है।”