मालदीव में चल रही तमाम गतिरोधों के बीच राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने दोस्त देशों से मदद की गुहार लगाई है और विशेष दूत भी भेजे हैं। मालदीव ने अपने विशेष दूत चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब भेजे हैं। इन सबके बीच चौंकाने वाली खबर ये है कि मालदीव के दोस्त माने जाने वाले भारत से कोई संपर्क नहीं साधा है। ये हाल तब हैं जब भारत हमेशा से मालदीव का समर्थक रहा है।

लेकिन उनके दूतों के भारत न आने की खबर पर दिल्ली में मालदीव के राजदूत ने सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि मालदीव के राष्ट्रपति के दूत का पहला पड़ाव भारत था लेकिन कार्यक्रम तय नहीं हो पाने के कारण वो भारत नहीं आ सके। मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब में अपने दूत भेजे हैं। ताकि वो वहां की राजनीतिक संकट के बारे में जानकारी दे सकें।

मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद ने कहा, ‘सच कहूं तो योजना के अनुसार भारत मालदीव के राष्ट्रपति के विशेष दूतों का पहला पड़ाव था। लेकिन भारतीय नेतृत्व को कार्यक्रम के तारीख को लेकर दिक्कतें थीं।’ उन्होंने कहा, ‘हम समझ सकते हैं कि विदेशमंत्री देश के बाहर हैं और प्रधानमंत्री इसी हफ्ते यूएई की यात्रा पर जा रहे हैं।’

राष्ट्रपति यामीन ने आर्थिक मामलों के मंत्री मोहम्मद सईद को चीन और विदेश मंत्री मोहम्मद असीम को पाकिस्तान वहां के हालात की जानकारी देने के लिये भेजा है। मत्स्य पालन और कृषि मंत्री मोहम्मद शाइनी को सउदी अरब भेजा गया है।

आपको बता दे कि 2012 में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मोहम्मद नशीद के सत्ता में आने के बाद से कई बार राजनीतिक संकट देख चुका है। बता दें कि मालदीव संकट तब और बढ़ गया जब यामीन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति नाशीद की रिहाई के साथ नौ अन्य विपक्षी नेताओं को रिहा करने के आदेश दे दिया था। उसके बाद राष्ट्रपति यामीन ने सुप्रीम कोर्ट के पांच जज सहित सभी को गिरफ्तार करने का निर्देश जारी कर दियाथा। बता दें कि निष्कासित राष्ट्रपति नाशीद पहले लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता थे।

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