नए युग के योगी


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योग एक ऐसी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। यह शब्द, प्रक्रिया और धारणा बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू धर्म की ध्यान प्रक्रिया से सम्बन्धित है। यह शब्द भारत से बौद्ध धर्म के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण-पूर्व एशिया और श्रीलंका में फैला और वर्तमान में सारे सभ्य जगत के लोग इससे परिचित हैं। इतनी ख्याति के बाद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी है। खगोल शास्त्र की दृष्टि से 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन तो है ही लेकिन इस दिन भारत के ज्ञान ने जो विश्व पटल पर छलांग लगाई है वह अपने आप में कीर्तिमान है। आज दुनिया के 195 देशों में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। सागर से लेकर ऊंची पर्वत शृंखलाओं पर चीन की महान दीवार व संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के मैदान पर लोगों को योग करते देखा तो अहसास हुआ कि आज की युवा पीढ़ी योग की तरफ आकर्षित है। भगवद् गीता भारत का प्रतिष्ठित ग्रंथ है।

उसमें योग शब्द का कई बार प्रयोग हुआ है, कभी अकेले तो कभी सविशेषण जैसे बुद्धियोग, संन्यास योग, कर्म योग। वेदोतर काल में भक्तियोग और हठयोग नाम भी प्रचलित हुए। वैसे तो योग हमेशा से ही हमारी प्राचीन धरोहर रही है। समय के साथ-साथ योग विश्व प्रख्यात तो हुआ ही साथ ही इसके महत्व को जानने के बाद आज योग लोगों की दिनचर्या का अभिन्न अंग भी बन गया है। भारत ऋषि पतंजलि के योग सूत्रों को भूल बैठा था। ऋषि पतंजलि को ही व्यापक रूप से योग दर्शन का संस्थापक माना जाता है। ऋषि-मुनि, संन्यासी तो योग के बारे में जानते थे, लेकिन भारत में योग को घर-घर पहुंचाने का श्रेय बी.के.एस. अयंगर और बाबा रामदेव को ही जाता है। अयंगर को अयंगर योग का जन्मदाता कहा जाता है। उन्होंने योग को देश और दुनिया में फैलाया। योग गुरु बाबा रामदेव ने योगासन औैर प्राणायाम योग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और योग को देश-विदेश में शिविर लगाकर प्रचारित किया। इसी के चलते आज नई पीढ़ी के उन युवाओं को देखा जो योग प्रसार को मिशन बनाकर आगे ले जा रहे हैं और उन्होंने इस सदियों पुरानी परम्परा को अपना करियर बना लिया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लखनऊ में योग करने से पूर्व अपने सम्बोधन में भी कहा है कि आज योग रोजगार के लिए एक विस्तार करने वाला क्षेत्र बन गया। नए योगा संस्थान खुल रहे हैं और योगा शिक्षक काम पा रहे हैं। आज योगा शिक्षकों की जरूरत देश में ही नहीं विदेशों में भी है। आज टीवी चैनलों पर युवा चेहरों को योगासन सिखाते देखा जा रहा है और दर्शक घर बैठे उनका अनुकरण कर रहे हैं। अब पहाड़ों, जंगलों में जाकर, गुफाओं या कंदराओं में बैठकर ध्यान लगाने का नाम नहीं है योग। योग अब केवल संन्यासियों की सम्पदा नहीं रह गया बल्कि यह अब भारतीय युवाओं की जीवनशैली बन चुका है। अनेक ऐसे युवक और युवतियां भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने आकर्षक पैकेज वाली नौकरी या सम्भावनाओं से भरी डिग्री हासिल करने की बजाय योग की राह चुनी है। वे अपने हाईफाई योग स्टूडियोज, डीवीडी, पुस्तकों, टीवी चैनल्स, वेबसाइट्स और सोशल साइट्ïस के जरिये योग को घर-घर पहुंचा रहे हैं। इन योगियों ने योग के सहारे न केवल खुद की जिन्दगी बदली बल्कि अपने ज्ञान, प्रभाव और अपने प्रयासों से दूसरों की जिन्दगी में भी आत्मशांति का संदेश फैलाया। ऐसे कुछ युवा काफी लोकप्रिय हो रहे हैं जिन्हें स्कूलों, कालेजों, खेल संस्थानों के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय आयोजनों में योग पर लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

यह नए युग के योगी हैं। योग शरीर को निरोग बनाता है यह भी सब जानते हैं लेकिन योग की बढ़ती लोकप्रियता से मुस्लिम देशों को घबराहट जरूर हो रही है। अमेरिका में रहने वाली एक मुस्लिम महिला फरीदा हमजा योग शिक्षक बनी हैं लेकिन मुस्लिमों की प्रतिक्रिया उनके प्रति सकारात्मक नहीं। मुस्लिम, ईसाई और यहूदी योग को हिन्दू और बौद्ध धर्म से जुड़ी एक प्राचीन आध्यात्मिक साधना मानते हैं। ईरान में योग की कक्षाएं काफी लोकप्रिय हैं, वहां इसे एक खेल के रूप में देखा जाता है। वहां योग फैडरेशन वैसे ही काम करती है जैसे टेनिस या फुटबाल प्रशासन। वहां प्रत्येक आसन के शारीरिक लाभों के बारे में चर्चा की जाती है। आध्यात्मिक योग पर मलेशिया में प्रतिबंध है। अमेरिका में योग को नया स्वरूप दिया गया है। कई स्कूलों में पद्मासन को ‘क्रिस क्रास एपल सॉस’ नाम दिया गया है। सूर्य नमस्कार का नाम बदल कर ओपनिंग सीक्वेंस कर दिया गया है। कई मुस्लिम भी योग के समर्थक हैं। उनका मानना है कि मुस्लिम जिस तरह से नमाज पढ़ते हैं, उनकी हर अवस्था यौगिक मुद्रा ही है। आज योग का स्वरूप हर धर्म के लोगों ने बदल दिया है लेकिन योग उनके जीवन से किसी न किसी तरह जुड़ा जरूर है। बिना एक रुपया खर्च करके अगर आज की तनाव भरी जिन्दगी में निरोगी रहा जाए तो इससे बड़ी कोई और बात नहीं। भारत के नए योगी योग को जिस ढंग से प्रचारित कर रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि भारत ज्ञान के मामले में विश्व गुरु है और रहेगा।