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एअर इंडिया में अपनी शत प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, बोली नियमों को सरल बनाया

नयी दिल्ली : सरकार ने आखिरकार रिण बोझ तले दबी सरकारी विमानन कंपनी एअर इंडिया में अपनी शत प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिये सोमवार को शुरुआती बोली लगाने के दस्तावेज जारी कर दिये। पिछले दो साल से भी कम समय में यह दूसरा मौका है जब सरकारी एअरलाइन के लिये विनिवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। सरकार ने इस बार बोली लगाने के नियमों को सरल रखने के साथ ही प्रस्तावित इच्छुक खरीदारों के समक्ष विमानन कंपनी की बकाया कर्ज राशि को भी स्पष्ट कर दिया है। प्रस्तावित बोलीदाताओं को 17 मार्च तक रूचि पत्र के साथ बोलियां सौंपनी होंगी। 

राजस्व प्राप्ति कम रहने और वित्तीय घाटा बढ़ने की आशंका के मद्देनजर सरकार के लिये एअर इंडिया का विनिवेश काफी महत्वपूर्ण है। सरकार एअर इंडिया की शत प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के साथ ही मुनाफे में चल रही इसकी सस्ते किराये वाली अनुषंगी एअर इंडिया एक्सप्रेस का भी विनिवेश करेगी। इसके अलावा एअर इंडिया सैट्स एअरपोर्ट सर्विसेस (एआईसैट्स) संयुक्त उद्यम में भी कंपनी की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश किया जायेगा। इन तीनों इकाइयों को एक साथ बेचा जायेगा और संभावित नये निवेशक को इनका प्रबंधन नियंत्रण भी सौंप दिया जायेगा। 

प्राथमिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) के मुताबिक इसमें एक उल्लेखनीय पहल जो की गई है उसके मुताबिक सफल बोलीदाता को केवल 23,286.5 करोड़ रुपये का कर्ज ही लेना होगा। हालांकि, अधिग्रहण सौदा पूरा होने के मौके पर मौजूदा संपत्ति के आधार पर देनदारी को तय किया जायेगा। शेष कर्ज राशि जो कि 31 मार्च 2019 को 60,074 करोड़ रुपये थी उसे विशेष उद्देशीय निकाय एअर इंडिया एसेट होल्डिंग्स लिमिटेड (एआईएएचएल) को हस्तांतरित कर दिया जायेगा। ज्ञापन में कहा गया है कि न्यायमूर्ति धर्माधिकारी आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों के करीब 1,383.70 करोड़ रुपये के पुराने बकाये का भुगतान सरकार द्वारा किया जायेगा। इसमें कहा गया है कि नया निवेशक ‘एअर इंडिया’ ब्रांड का इस्तेमाल करता रहेगा। 

सरकार ने इसके साथ ही बोली लगाने वालों के पहले तय शर्तों में कुछ राहत दी है। अब 3,500 करोड़ रुपये नेटवर्थ वाली कंपनी अथवा समूह एअर इंडिया के लिये बोली लगा सकता है। समूह में अलग अलग सदस्य के लिये न्यूनतम हिस्सेदारी की सीमा को कम कर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले 2018 के दौरान नेटवर्थ के लिये 5,000 करोड़ रुपये की सीमा रखी गई थी। एक और अहम बदलाव यह किया गया है कि कोई भी कंपनी अपनी मूल कंपनी के बलबूते पर बोली लगा सकती है। इसका तात्पर्य यह हुआ कि किसी बड़ी कंपनी के स्वामित्व वाली छोटी इकाई भी बोली लगा सकती है। 

इसके साथ ही कोई भी घरेलू एयरलाइन शून्य अथवा नकारात्मक नेटवर्थ के साथ भी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी ले सकती है बशर्ते कि जिस समूह की वह सदस्य है उसके द्वारा नेटवर्थ मानदंड को पूरा कर लिया गया हो। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि संसाधनों के अभाव के चलते एअर इंडिया का विनिवेश किया जा रहा है। मंत्रालय के मुताबिक एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस में कुल मिलाकर 17,984 कर्मचारी है। इनमें 9,617 कर्मचारी स्थायी हैं। इनमें प्रतिनियुक्ति पर एअर इंडिया में गये कर्मचारी भी शामिल है।